उदयपुर : “ये बच्चों का खेल नहीं, तुम समझ नहीं पाओगे”—पिता के मुंह से निकले इन चंद कड़वे शब्दों ने उदयपुर के चंद्रजीत सिंह राजावत के भीतर ऐसा जुनून पैदा किया कि उन्होंने राजस्थान के (he chose chess) पहले ‘एरिना ग्रैंडमास्टर’ (Arena Grandmaster – AGM) बनकर ही दम लिया।
he chose chess – यह किस्सा उनके आईआईटी (IIT) की तैयारी के दिनों का है, जब उन्हें निंटेंडो के मारियो गेम के साथ शतरंज जैसा एक खेल दिखा। उनके पिता की उस खेल में पहले से काफी रुचि थी। जब उन्होंने पिता को खेलते देखा, तो खुद भी खेलने की इच्छा जताई। लेकिन पिता ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि वे इसे नहीं समझ पाएंगे। इस एक बात ने युवा चंद्रजीत की जिंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी।
सफलता के पीछे छिपा कड़ा संघर्ष
चंद्रजीत ने चुनौती को स्वीकार करते हुए शतरंज की बारीकियों को खुद समझना शुरू किया:
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पहले ही दिन जीत: खेल के नियम खुद सीखने के अगले ही दिन उन्होंने अपने पिता को शतरंज की बाजी में हरा दिया।
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वैश्विक स्तर पर पहचान: आज चंद्रजीत न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के छात्रों को शतरंज सिखाते हैं और पेशेवर ट्रेनर्स (प्रशिक्षकों) को भी प्रशिक्षित करते हैं।
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IIT की अच्छी रैंक के बाद भी नहीं ली काउंसलिंग, घर छोड़कर दिल्ली का रुख
चंद्रजीत ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ा और साहसिक कदम उठाया:
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आईआईटी छोड़ना: उन्होंने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा दी और बेहतरीन रैंक हासिल की, लेकिन काउंसलिंग फॉर्म भरने से साफ इनकार कर दिया।
किंगडम ऑफ चेस एकेडमी: 2019 में उदयपुर लौटकर उन्होंने ‘किंगडम ऑफ चेस एकेडमी’ की स्थापना की।
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अंतरराष्ट्रीय पदक: उनके द्वारा प्रशिक्षित 100 से अधिक विद्यार्थियों ने स्टेट, नेशनल, कॉमनवेल्थ, एशियन गोल्ड और वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। आज उनकी एकेडमी विश्व के 30 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रही है।
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