देवघर: झारखंड को खनिज संपदा के मामले में देश के सबसे समृद्ध राज्यों में गिना जाता है. लेकिन जब बात बुनियादी सुविधा और शिक्षा व्यवस्था की आती है, तो तस्वीर बिल्कुल विपरीत नजर आती है. सरकार एक ओर ‘सीएम एक्सीलेंस स्कूल’ जैसी योजनाओं के जरिए शिक्षा को नई दिशा देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है.
400 बच्चों के स्कूल में जर्जर शौचालय
देवघर प्रखंड के गौरीपुर गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय इस सच्चाई का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है. यहां करीब 400 बच्चे पढ़ाई करते हैं. लेकिन उनके लिए बने शौचालय पिछले दो वर्षों से बंद पड़े हैं. हालत यह है कि बच्चों को खुले में या फिर घर जाकर शौच करने को मजबूर होना पड़ता है. स्कूल के छात्र-छात्राओं का कहना है कि शौचालय की यह समस्या अब उनकी रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है. खासकर बड़ी बच्चियों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है. जहां उनकी सुरक्षा और गरिमा दोनों खतरे में पड़ जाती हैं.
समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई है: ग्रामीण
ग्रामीण शिवरीनारायण दास बताते हैं कि बीते दो वर्षों से इस समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है. लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. वहीं नागेंद्र यादव का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं दिखी. गांव के ही राहुल बताते हैं कि बच्चों को जब शौच की जरूरत होती है, तो उन्हें स्कूल परिसर छोड़कर बाहर जाना पड़ता है या घर लौटना पड़ता है. जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है.
समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई है: ग्रामीण
ग्रामीण शिवरीनारायण दास बताते हैं कि बीते दो वर्षों से इस समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है. लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. वहीं नागेंद्र यादव का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं दिखी. गांव के ही राहुल बताते हैं कि बच्चों को जब शौच की जरूरत होती है, तो उन्हें स्कूल परिसर छोड़कर बाहर जाना पड़ता है या घर लौटना पड़ता है. जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है.
जल्द स्कूल के शौचालय होंगे चालू: जिला शिक्षा अधीक्षक
इस मामले को लेकर ईटीवी भारत की टीम जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार से बात की. उन्होंने आश्वासन दिया कि हाल ही में उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में जर्जर शौचालयों को चिन्हित कर उन्हें जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए कहा गया है और जल्द ही गौरीपुर विद्यालय के शौचालय चालू करने का भरोसा भी दिया गया है.
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ये आश्वासन जमीन पर उतर पाएंगे या फिर बच्चों को यूं ही मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा. सरकार के दावे और जमीनी हकीकत के बीच की यह खाई साफ दिखा रही है कि शिक्षा सुधार की राह अभी लंबी है. देवघर के इस स्कूल की तस्वीर सिर्फ एक उदाहरण है, जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ी कर रही है.
