रायपुर। मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद की खबरें सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। निर्वाचन आयोग के तीन सदस्यों में से दो चुनाव आयुक्तों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को लिखित आपत्तियां दर्ज कराने और उन पर सुनवाई न होने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस मुद्दे पर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे फर्जी/गलत मतदाताओं के नाम छांटने की एक पारदर्शी नीतिगत प्रक्रिया बताया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर निष्पक्ष न रहने का आरोप जड़ा है।

political turmoil in Chhattisgarh – इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यदि मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है और उसमें अयोग्य अथवा गलत प्रविष्टियों को हटाया जा रहा है, इसमें आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया पुनरीक्षण का कार्य (political turmoil in Chhattisgarh)मतदाता सूची के सुदृढ़ीकरण और पारदर्शिता के लिए होता है, जो समय-समय पर चलने वाली एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।

 कांग्रेस का तीखा पलटवार

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की टिप्पणियों से यह साबित हो गया है कि (political turmoil in Chhattisgarh) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार निष्पक्षता से काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने के दौरान 14 मौकों पर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा व्यक्त की गई लिखित आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया, जो आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है।

Share.
Exit mobile version