झाड़ू, जो दिखने में एक आम घरेलू वस्तु लगती है, वास्तु और शास्त्रों में इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है. पुराने ग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है कि जिस घर में झाड़ू का अनादर होता है, वहां लक्ष्मी का वास नहीं होता. झाड़ू बदलते समय कुछ खास नियमों का पालन करने से ना सिर्फ दरिद्रता दूर होती है बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और धन (changing the broom) की स्थिरता भी बनी रहती है. जानिए वो 3 बेहद जरूरी नियम, जिनका पालन नहीं करने पर मां लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं.
changing the broom – पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में झाड़ू को अपमानित किया जाता है या सही विधि से नहीं बदला जाता, वहां से लक्ष्मीजी रुष्ट होकर चली जाती हैं. झाड़ू का घर में होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है इसका सम्मान और समय-समय पर इसका बदलना.
झाड़ू बदलने का सही दिन और मुहूर्त रखें
झाड़ू को कभी भी किसी भी दिन नहीं बदलना चाहिए. इसे बदलने के लिए शनिवार या मंगलवार को चुनना अशुभ माना गया है. गुरुवार और शुक्रवार को झाड़ू बदलना विशेष शुभ होता है क्योंकि ये दिन देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम माने जाते हैं. झाड़ू सुबह सूर्योदय से पहले या संध्या के बाद ही घर से बाहर करें.
नई झाड़ू में छिड़कें थोड़ा सा नमक
जब भी आप नई झाड़ू लाएं, तो पहली बार उसे इस्तेमाल करने से पहले उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक या सामान्य नमक छिड़क दें. इसे घर के मुख्य दरवाज़े के पास या घर के बीच से झाड़ू लगाकर शुरू करें. मान्यता है कि नमक में शुद्धिकरण की शक्ति होती है और यह नकारात्मक ऊर्जा को खींचकर बाहर कर देता है. इस छोटे से उपाय से घर में सुख-शांति और धन की स्थिरता बनी रहती है.
