भोपाल : मध्य प्रदेश में टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर राजनीति तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि टीईटी को जल्दबाजी में लागू किया गया तो प्रदेश के दो लाख से अधिक (Digvijay Singh’s letter to CM) शिक्षकों की नौकरी और आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है. सिंह ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह सर्वाेच्च न्यायालय में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटिशन दायर कर शिक्षकों के हितों की रक्षा करे.
Digvijay Singh’s letter to CM – दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि मार्च 2026 में जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के शासकीय स्कूलों में कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है. यह परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित होने की संभावना है. इस निर्णय के बाद स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के दो लाख से अधिक शिक्षकों में गहरी चिंता का माहौल है. खासतौर पर वे शिक्षक जो पिछले 25 से 30 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, उनके लिए सेवा के अंतिम चरण में इस प्रकार की परीक्षा अनिवार्यता को अनुचित बताया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सीएम को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया था, जिसे मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2010 से लागू किया गया. इसी संदर्भ में सर्वाेच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र से जुड़े एक मामले में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य करने का निर्णय दिया है.



