धनबाद। कोयलांचल धनबाद के कतरास स्थित छाताबाद क्षेत्र में एक बार फिर जमीन धंसने की सनसनीखेज घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
अचानक तेज धमाके की आवाज के साथ जमीन में जोरदार हलचल हुई और बड़ा भू-धंसान हो गया। इस घटना के तुरंत बाद आसपास बने कई रिहायशी मकानों की दीवारों और छतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। खतरे को भांपते हुए लोग अपने मासूम बच्चों व परिजनों के साथ जान बचाकर घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुराने बंद पड़े खनन क्षेत्र में लगातार हो रही जमीन धंसने की घटनाएं उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व खदान प्रबंधन से प्रभावित क्षेत्र की तत्काल तकनीकी जांच और सुरक्षा के ठोस उपाय करने की मांग की है।
🏚️ पुराने खनन क्षेत्र के ऊपर बसी है विशाल आबादी: बार-बार की घटनाओं से मंडरा रहा बड़ा खतरा
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, छाताबाद और आसपास का यह पूरा इलाका दशकों से बीसीसीएल की भूमिगत खनन गतिविधियों से प्रभावित रहा है।
अवैध खनन और खदानों की सही तरीके से बालू भराई (Sand Stowing) न होने के कारण पुराने खनन क्षेत्र के ऊपर बसी इस घनी आबादी पर हर समय जमीन धंसने की तलवार लटकी रहती है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पूर्व में भी इस इलाके में कई बार जमीन धंसने और गोफ बनने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। घटना के बाद ग्रामीणों ने जब पूरे मोहल्ले का जायजा लिया, तो दर्जनों पक्के मकानों में दरारें देखकर वे अनहोनी की आशंका से सिहर उठे।
🛑 ‘सिर्फ निरीक्षण से नहीं चलेगा काम’: अधिकारियों की चुप्पी पर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
घटना के बाद से प्रभावित स्थानीय लोगों में बीसीसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन के खिलाफ गहरा असंतोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि हर हादसे के बाद अधिकारियों का मौका-मुआयना करना महज एक खानापूर्ति बनकर रह गया है, जिससे समस्या का कोई स्थायी हल नहीं निकलता। उन्होंने मांग रखी है कि इस पुराने खनन क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों से जांच कराई जाए, भू-गर्भीय स्थिति का विस्तृत सर्वे हो और प्रभावित मकानों की सुरक्षा का वैज्ञानिक आकलन किया जाए। वहीं दूसरी ओर, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या बीसीसीएल प्रबंधन का प्रतिनिधि कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहा है।
❓ सुरक्षा का स्थायी इंतजाम कब होगा? खौफ के साए में रात बिताने को मजबूर हैं परिवार
अधिकारियों की इस बेरुखी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर बार-बार हो रहे इस भू-धंसान के बीच इस घनी आबादी वाले इलाके की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था कब की जाएगी?
फिलहाल, अचानक जमीन धंसने और मकानों में आई भयावह दरारों के बाद से छाताबाद के दर्जनों परिवार अपने ही आशियानों में खौफ के साए में रातें बिताने को विवश हैं और प्रशासन से अविलंब राहत व पुनर्वास की आस लगाए बैठे हैं।

