धमतरी: शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध न होने से आक्रोशित ‘निजी विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ’ ने गुरुवार को सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। स्कूल संचालकों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अविलंब पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की।
📉 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर संकट
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सत्र शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अभी भी कई विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं मिली हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई पिछड़ रही है, बल्कि स्कूलों को भी अपना पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का दबाव भी स्कूल प्रबंधन पर बढ़ता जा रहा है।
⚠️ अधिकारियों की लापरवाही और भेदभाव का आरोप
संघ के सदस्य सुबोध राठी ने आरोप लगाया कि यह समस्या पाठ्यपुस्तक निगम के अधिकारियों की लापरवाही और वितरण व्यवस्था में समन्वय की कमी का परिणाम है। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से लगातार ऐसी अव्यवस्था बनी हुई है, जो यह दर्शाती है कि निजी स्कूलों के साथ वितरण के मामले में भेदभाव किया जा रहा है। संघ ने मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और निजी स्कूलों को भी संकुल स्तर पर समयबद्ध तरीके से पुस्तकें वितरित की जाएं।
📋 प्रशासन का आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान डिप्टी कलेक्टर मनोज मरकाम ने संघ का ज्ञापन स्वीकार किया और आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को शासन तक पहुँचाया जाएगा। वहीं, निजी स्कूल संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।


