पलामू: प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीएसपीसी अपने पैटर्न को बदल रही है. नक्सल संगठन खुद को कोयला एवं अफीम वाले क्षेत्र में सक्रिय रखना चाहती है. टीएसपीसी के पास मात्र दो इनामी कमांडर बचे हैं. 25 लाख के इनामी टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू और 10 लाख के इनामी शशिकांत जेल से बाहर निकलने वाले कमांडरों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.
दरअसल, लातेहार के इलाके में जेल से बाहर निकलने वाला टीएसपीसी का कमांडर नथुनी शशिकांत गंझू के दस्ते में शामिल हुआ है. टीएसपीसी के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू संगठन को फिर से खड़ा करना चाहता है और इस कार्य में एक गिरफ्तार कमांडर मदद कर रहा है. पूरी जिम्मेदारी शशिकांत गंझू को सौंपी गई है.
टीएसपीसी कमांडरों ने की है समीक्षा
सितंबर 2025 में पलामू के मनातू के इलाके में टीएसपीसी और सुरक्षा बलों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी. इस मुठभेड़ में 5 लाख के इनामी मुखड़े यादव मारा गया था. इस घटना के बाद टीएसपीसी के दस्ते में शामिल कई नक्सली गिरफ्तार हुए थे और उन्होंने आत्मसमर्पण भी कर दिया था.
मुठभेड़ में दस्ते का नेतृत्व कर रहे टीएसपीसी कमांडर शशिकांत गंझू बच निकला था. इस घटना के बाद टीएसपीसी के ब्रजेश गंझू एवं एक गिरफ्तार नक्सली ने हालात को लेकर समीक्षा की थी. टीएसपीसी के टॉप कमांडरों की बातचीत में कहा गया था कि शराब और लड़की खत्म होने का बड़ा कारण है. टीएसपीसी का सुप्रीमो ब्रजेश गंझू चतरा के लावालौंग का रहने वाला है जबकि शशिकांत गंझू पलामू के मनातू के केदल गांव का रहने वाला है.
एक साल में टीएसपीसी को हुए है कई बड़े नुकसान
नक्सल संगठन टीएसपीसी को 2025 में कई बड़े नुकसान हुए हैं. पलामू एवं चतरा के इलाके में अलग-अलग मुठभेड़ में तीन कमांडर मारे गए हैं. जबकि टीएसपीसी के सुप्रीमो की भूमिका में आक्रमण गंझू गिरफ्तार हुआ है. 2025 में टीएसपीसी के 12 टॉप कमांडर भी गिरफ्तार हुए हैं. टीएसपीसी के बचे हुए कमांडरों को भी पुलिस ने टारगेट पर लिया है और कोशिश की है कि 31 मार्च से पहले उन्हें खत्म कर दिया जाए या उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए.
टीएसपीसी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. एक नक्सली द्वारा मदद करने की जानकारी मिली है. नक्सल संगठन के खिलाफ पुलिस सख्त है, उनके किसी भी कमांडर को छोड़ नहीं जाएगा. पुलिस सरेंडर करने की अपील भी कर रही है और अपनी कार्रवाई भी कर रही है: किशोर कौशल, डीआईजी, पलामू रेंज
2004-05 के आसपास बना था नक्सल संगठन टीएसपीसी
दरअसल 2004-05 में नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी का गठन हुआ था. भाकपा माओवादी से अलग होकर यह संगठन बना था. टीएसपीसी का प्रभाव झारखंड के चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग, रामगढ़, रांची समेत कई इलाको में रहा है. वर्चस्व की लड़ाई को लेकर टीएसपीसी एवं भाकपा माओवादी के बीच कई बार भीषण मुठभेड़ हुई है. इस मुठभेड़ में 50 से अधिक नक्सली मारे भी गए हैं. फिलहाल टीएसपीसी का दस्ता पलामू-चतरा सीमावर्ती इलाके के अलावा कोयला क्षेत्र में कभी-कभी सक्रिय होता है.
