Cyber Cell in India साइबर क्राइम से निपटने की दिशा में एक ट्रैक समाधान हैं| अब साइबर-अपराध का एक अधिनियम एक दंडनीय आपराधिक अधिनियम है जिसमें ऑनलाइन स्टैकिंग, ऑनलाइन बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड घोटाले, हैकिंग और सॉफ्टवेयर वायरस को सक्रिय करने जैसे कार्य शामिल हो सकते हैं|
ये साइबर क्राइम सेल भारत में शहरों के आपराधिक जांच विभागों के दिमाग की उपज हैं और इन विभागों के तहत केवल इंटरनेट से संबंधित अपराधिक गतिविधियों के मुद्दे को संभालने के लिए खोला गया है| यह कंप्यूटर और इंटरनेट आधारित अपराध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत संचालित होते हैं और अधिनियम आगे ऐसे कृत्यों को दंडित करता है|
Cyber Cell in India – साइबर क्राइम कितने प्रकार का होता है :-
वेबसाइट हैकिंग
अगर साइबर क्राइम की बात करें तो इसमे सबसे बड़ा और ज्यादा होने वाला जो साइबर क्राइम वेबसाइट हैकिंग अपने इंडिया में ही हर रोज़ हजारो की तादाद में वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट जैसे की फेसबुक और व्हट्स एप्प हैक हो रहे है| किसी के कंप्यूटर या सोशल मीडिया या बैंकअकाउंट को अनाधिकृत तरह से एक्सेस करना हैकिंग होता है| हैकर आपकी वेबसाइट को हैक करके कॉन्फिडेंशियल डाटा को चुरा कर उसका गलत तरीके से इस्तेमाल करते है|
हैकिंग बैंक अकाउंट
आज के समय में इस तरह के केस कुछ ज्यादा ही बढ़ रहे है इसमें गैरकानूनी ढंग से किसी के बैंक अकाउंट से ऑनलाइन बैंक का इस्तेमाल करते हुए हैकर पैसे निकाल लेते है, ऐसा करना क़ानूनन अपराध हैं|
साइबर टेररिज्म
इन्टरनेट का इस्तेमाल करते हुए देश दुनिया में गलत अफवाहे फैलाकर देश की शांति व्यवस्था को बहाल करना और लोगो को आपस में लड़ाना इसको साइबर आतंकवाद कहते है|
पोर्नोग्राफी
इन्टरनेट के माध्यम से सेक्सुअल चीज़े जैसे अशलील वीडियो, ऑडियो और फोटोज को फैलाना पोर्नोग्राफी कहा जाता है अगर कोई गैर कानूनी तरीके से पोर्न की वेबसाइट या वीडियो भी ब्ननाता है तो ऐसा करना साइबर क्राइम है| अगर किसी 18 साल की उम्र से कम लड़की या लड़के ऐसा करते हैं तो यह चाइल्ड पोर्नोग्राफी के अन्दर आता है|
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वायरस और ट्रोजन अटैक्स
वायरस और ट्रोजन कंप्यूटर प्रोग्रामिग लैंग्वेज का इस्तेमाल करके बनाये जाते है और यह इन्टरनेट के द्वारा एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में फैल जाते है| जब आपके कंप्यूटर में वायरस और ट्रोजन आ जाता है तो आपके न चाहते हुए भी यह आपके सिस्टम में एक्टिवेट हो जाता है और आपके कंप्यूटर का महत्वपूर्ण डाटा चोरी या डिलीट हो जाता है|
सॉफ्टवेर प्राइवेसी
आज कल हर एक सॉफ्टवेर इन्टरनेट पर बड़ी आसानी से मिल जाता है लेकिन किसी प्रो सॉफ्टवेर को बिना कोई पैसा देकर डाउनलोड करना, कॉपी करना, बेचना और अपने कंप्यूटर या मोबाइल में इस्तेमाल करना सॉफ्टवेर प्राइवेसी होता है यह एक क्राइम है|
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Cyber Cell in India : साइबर क्राइम को रोकने के क्या-क्या उपाय है?
इसमें सबसे पहला स्टेप है कि एक साइबर क्राइम कंप्लेंट रजिस्टर करें वो भी रिटेन कंप्लेंट अपने शहर में या पास के साइबर क्राइम सेल में जहाँ आप रहते हैं|
IT Act के अनुसार, एक साइबर क्राइम ग्लोबल जुरिस्डएक्शन के अंतर्गत आता है| इसका मतलब है की आप एक साइबर क्राइम कंप्लेंट को भारत के किसी भी साइबर सेल में कर सकते हैं| इसके लिए आपको कहीं स्पेसिफिकली जाने की जरुरत नहीं होती है| अभी भारत में प्राय सभी बड़े शहरों में डेडिकेटेड साइबर क्राइम सेल खुल चुके हैं|
जब आप कोई साइबर क्राइम कंप्लेंट फाइल करें, तब आपको अपना नाम, कांटेक्ट डिटेल्स और मेलिंग एड्रेस देना पड़ता है| इसके बाद आपको एक रिटेन कंप्लेंट भी एड्रेस करना होता है|
अगर आप किसी ऑनलाइन हरासमेंट के शिकार हैं, तब आपको एक लीगल काउंसल असिस्ट कर सकता है रिपोर्टिंग के दौरान पुलिस स्टेशन में| इसके साथ ही आपको कुछ डाक्यूमेंट्स भी देने होते है|
Cyber Cell in India – कैसे रजिस्टर करें एक साइबर क्राइम FIR
अगर आपके शहर में कोई भी साइबर सेल नहीं है, तब आप एक फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) भी किसी एक लोकल पुलिस स्टेशन में दर्ज कर सकते हैं| अगर आपकी कंप्लेंट को एक्सेप्ट नहीं किया गया, तब आप कमिशनर को भी एप्रोच कर सकते हैं या सिटी के जुडिशल मजिस्ट्रेट को|
कुछ साइबर क्राइम ऑफनसेस इंडियन पैनल कोड के अंतर्गत भी आते हैं इसलिए इन्हें आप एक साइबर क्राइम FIR के तौर पर किसी निकटवर्ती लोकल पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट कर सकते हैं|
ज्यादातर साइबर क्राइम जिन्हें की इंडियन पैनल कोड कवर करता है उन्हें क्लासिफाइड किया जाता है कॉग्निज़बल ऑफनसेस के तौर पर| एक कॉग्निज़बल ऑफनसेस वह क्राइम होता है जिसमें की कोई भी वारंट की जरुरत ही नहीं होती है किसी को अरेस्ट या इंवेस्टिगेट करने के लिए|
ऐसे मामलों में एक पुलिस ऑफिसर को बाध्य होकर एक Zero FIR record करना होता है उस कंप्लेंट के लिए| फिर वो उसे फॉरवर्ड करेंगे उस पुलिस स्टेशन को जहाँ की ये ऑफेंस असल में हुआ है|
Zero FIR victims को बड़ा आराम प्रदान करता है क्योंकि इन मामलों में इमीडियेट अटेंशन/इन्वेस्टीगेशन करना पड़ता है और यह अति शीघ्र होता है|
Image Source : dnaindia.com

