भारत की कच्चे तेल की इंपोर्ट रणनीति अब एक नए बदलाव के दौर में प्रवेश कर रही है. आयातित खेप के आंकड़े और विश्लेषक बताते हैं कि सऊदी अरब के नेतृत्व में पश्चिम एशिया के आपूर्तिकर्ता अपनी बाजार हिस्सेदारी फिर से हासिल कर रहे हैं. वहीं, रूसी तेल की सप्लाई अब भी महत्वपूर्ण (supply reduced due to ban) बनी हुई है, लेकिन जियो पॉलिटिकल और इंटरनेशनल बैन के चलते इसमें कमी आ रही है.
रूस से होने वाली सप्लाई में कमी आने के कारण एक से 18 फरवरी के दौरान भारत का कुल कच्चा तेल आयात गिरकर औसतन 48.5 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) रह गया. यह जनवरी के 5.25 लाख बीपीडी के मुकाबले आठ प्रतिशत कम है. पिछले महीने प्रमुख रूसी निर्यातकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों और यूरोपीय संघ के 18वें प्रतिबंध पैकेज के प्रभावी होने के बाद वहां से आने वाले तेल के प्रवाह में यह गिरावट देखी गई है.
ग्लोबल कमोडिटी डाटा ऐनालिस्ट कंपनी ‘केपलर’ के प्रमुख रिसर्च ऐनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा कि फरवरी में भारत का रूसी कच्चा तेल आयात लगभग 10-12 लाख बीपीडी रहने का अनुमान है, जिसके मार्च में घटकर करीब 8-10 लाख बीपीडी तक आने की संभावना है. वर्ष 2022 में यूक्रेन वॉर के बाद भारी छूट पर मिलने के कारण भारत ने रूसी तेल की खरीद बड़े पैमाने पर शुरू की थी, लेकिन अब यह आवक बढ़ने के बजाय स्थिर होती दिख रही है
supply reduced due to ban – वर्तमान आकलन के अनुसार, अमेरिका और भारत के बीच एक व्यावहारिक समझ बनी है जो भारत को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए रूसी आयात की अनुमति देती है, लेकिन इसे और अधिक बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करती. जैसे-जैसे रूसी तेल की मात्रा कम हो रही है, पश्चिम एशिया खाड़ी देश इस कमी को पूरा कर रहे हैं.


