लुधियाना : बदलाव का सहारा लेकर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी की सरकार ने शिक्षा क्रांति के जो दावे किए हैं उनकी अब फूंक निकलती दिखाई देने लगी है। ताजा उदाहरण पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की फरवरी में ली जाने वाली 12वी की प्रैक्टिकल परीक्षाओं से जुड़ा है, परीक्षा केंद्रों पर जाकर स्टूडेंट्स के प्रैक्टिकल एग्जाम लेने के (claims of education revolution exposed) लिए सरकार के सरकारी स्कूलों से विषय विशेषज्ञ अध्यापकों की भारी कमी सामने आई है।
यही वजह है कि अब शिक्षा विभाग ने पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड से जुड़े प्राइवेट स्कूलों से विषय विशेषज्ञ अध्यापकों का रिकॉर्ड मंगवा – कर पोर्टल पर अपलोड किया है ताकि अब इन स्कूलों के अध्यापकों की प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए ड्यूटियां लगाई जा सकें। लेकिन अब सवाल यह है कि जिस शिक्षा विभाग के पास सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी,होम साइंस,कॉमर्स और कंप्यूटेट एप्लिकेशन जैसे अध्यापकों की भारी कमी है।
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जानकारी के मुताबिक सरकारी स्कूलों में साइंस, कॉमर्स विषयों जैसे लेक्चररों की भारी कमी के चलते इस बार बोर्ड को प्रैक्टिकल एग्जाम कंडक्ट कराने के लिए सरकारी के बजाय प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों पर निर्भर होना पड़ रहा है। हैरानीजनक आंकड़े यह बताते हैं कि अकेले लुधियाना जिले में ही प्रैक्टिकल के लिए लगभग 300 सेंटर बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनके मुकाबले विभाग के पास उपलब्ध लेक्चरर्स की संख्या मात्र एक चौथाई ही है।
claims of education revolution exposed – उदाहरण के तौर पर जिले के करीब 200 स्कूलों में मेडिकल और नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में फिजिक्स विषय पढ़ाया जा रहा है लेकिन इनका प्रैक्टिकल लेने के लिए विभाग के पास केवल 55 लेक्चरर ही मौजूद हैं। यही हाल केमिस्ट्री, बायो, होम साइंस, कॉमर्स, कंप्यूटर साइंस और कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे अन्य मुख्य विषयों का भी है।


