Chhattisgarh: गरियाबंद/जिले में कृषि भूमि का अवैधानिक रूप से प्लाटिंग कर गैर कृषि प्रयोजनों हेतु बेचने तथा रजिस्ट्रीका सिलसिला चोरी चोरी चुपके चुपके के किरदार में नज़र आ रहा है । जिसमे जिला प्रशासन कार्यवाही की जगह भू माफियाओं को संरक्षण देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है जिसके चलते ही यहां कृषि भूमि को अवैधानिक तरीके से प्लाटिंग करके रजिस्ट्री करने – कराने का काम किया जा रहा है ।
सवालों के दायरे में आते हैं ये सभी बातें
Chhattisgarh: क्या स्थानीय जिला प्रशासन इस बात से अनजान हैं, कि तहसील कार्यालय में होने वाले भूमि के रजिस्ट्रीकरण का भू खंड कृषि भूमि है या नहीं ?क्या गरियाबंद में चल रहे रावणभाठा,टोनही नाला,ग्राम आमदी (म) मजरकट्ट,होटल रेसिडेंस के पीछे से लेकर पाथर मोहंदा कछार तक प्लाटिंग कर आधे से ज्यादा कृषि भूमि को अवैधानिक तरीके से प्लाटिंग कर अन्य लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कर बेचा जा रहा है । जिसके चलते शहरी क्षेत्र के अनियंत्रित विकास को बढ़ावा मिल रहा है ।
कृषि भूमि को छोटे – छोटे टुकड़ो में बेचने से एक ओर जहाँ नक्शों का अद्यतीकरण नही हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर सीमांकन का कार्य भी नही हो पा रहा है । जिससे भूमि विवाद में लगातार वृद्धि हो रही है ।छत्तीसगढ़ भू – राजस्व संहिता की धारा 98 के अंतर्गत बनाये गये नियमों में यह स्पष्ट प्रावधान है कि कृषि भूमि का 0.05 एकड़ अथवा 0.05 रूपये लगान से कम उपखण्ड न किये जाएं । ऐसी स्थिति में कृषि भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ो में बेचना उक्त नियमों के विपरीत है । ऐसे प्रकरण नगरीय क्षेत्रों से लगे हुये ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हैं ।
Chhattisgarh: इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 61″क” से 61″छ” में कॉलोनी निर्माण से संबंधित प्रावधान दिये हुए हैं । जिसमें यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति कृषि भूमि को बिना व्यपवर्तित किये तथा कॉलोनी निर्माण का बिना रजिस्ट्रिीकरण कराये आवासीय प्रयोजन हेतु छोटे-छोटे टुकड़ो में विक्रय करता है तो उसका यह कृत्य अवैध कॉलोनी निर्माण की श्रेणी में आयेगा । इस हेतु पंचायत राज अधिनियम की धारा “61- घ” में अवैध कॉलोनी निर्माण के लिए दांडिक प्रावधान रखे गये हैं । जिले के अलावा मुख्यालय में अवैध प्लाटिंग का कारोबार बेखौफ चल रहा है ।

कलेक्टर के नाक के नीचे चल रहा भू माफियाओं का गोरख धंधा ?
Chhattisgarh: शासन-प्रशासन के सारे नियमों को परे रखकर यहां खेत खलिहान की आवासीय प्लाट के रूप में खरीदी बिक्री हो रही है । स्थिति यह है कि शहर के आसपास के इलाकों में रोज कहीं ना कही कॉलोनी का नक्शा खींचा जा रहा है । जिला मुख्यालय में निम्न जगहों पर कृषि भूमि को इसी तरह अंजाम दिया गया है । जिसके सहित आसपास के इलाकों में भी इन दिनों अवैध प्लाटिंग का कारोबार जोर-शोर से हो रहा है । नगर पालिका गरियाबंद सहित अन्य नगरीय निकाय क्षेत्रों में बड़े स्तर पर अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है । यहाँ बिल्डर रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ( रेरा ) को दरकिनार कर प्लाट बेच रहे हैं जिसे संबंधित विभाग मुखदर्शन बना भूमि माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं । इसके चलते प्लाट खरीदने वाले लोग भविष्य में परेशानी में भी आ सकते हैं ।
शहर व आसपास के गांव से लगे खेतों की बिक्री आवासीय प्लाट के रूप में बेधड़क हो रही है । इन खेतों को प्लाटिंग करने वाले लोग पहले एकआधी सड़क तैयार करते हैं । इसके बाद वहां अपने तरीके से प्लाटिंग करते हैं । कृषि योग्य भूमि को प्लाटक के रूप में विकसित कर खरीदी बिक्री के लिए नियमानुसार डायवर्सन करना पड़ता है,एक से अधिक प्लाट काटने के बाद नियमानुसार (कॉलोनाइजर) एक्ट के तहत सभी फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद उसकी खरीदी बिक्री होनी चाहिए,लेकिन बिना पंजीयन के ही न केवल आवासीय कॉलोनी डेवलप हो रहे हैं ।
Chhattisgarh: बल्कि खेत खलिहान का आवास के रूप में धड़ल्ले से अवैधानिक प्लाटिंग भी हो रही है । वहीं शहर में ऐसी कई कॉलोनियां हैं जिनके अवैध के मामले विभागों में अब भी वर्तमान में लंबित चल रहे हैं । छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ( रेरा ) के नियमानुसार किसी भी बिल्डर को जमीन की प्लाटिंग करने से पहले (रेरा) में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है । इसके अलावा प्लाट बेचने से पहले बिल्डर वहां जन सूविधाओं से जूड़ी चीजें जिसमे पानी निकासी के लिए नाली,पानी,सड़क,बिजली व सीवर,खेल मैदान आदि की सुविधा उपलब्ध करायेगा ।मगर जिला मुख्यालय सहित अन्य नगरीय निकायों में अवैध प्लाटिंग का खेल जोरों पर चल रहा है । यहाँ कई एकड़ कृषि भूमि खेतों की अवैध प्लाटिंग कर खरीददारों को बेचा जा रहा है ।

भू–माफियाओं का एक तरफा राज..कार्यवाही के जगह विभाग की अनदेखी पर बड़ा सवाल ।
Chhattisgarh: बेखौफ है भू-माफिया —- जमीन दलालों के वायदे और झूठे बातों के फेर में फंसकर जमीन व मकान खरीदने वाले लोगों को बाद में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है । सैकड़ों लोग डायवर्सन व एनओसी के लिए महीनों से कलेक्ट्रोरेट व नगरपालिका दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं । भूमाफियाओं के झांसे में आए लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है । इसके बावजूद जिले में तेजी से बढ़ रहे अवैधानिक प्लाटिंग का कारोबार जोरों पर चल रहा है।
रिपोर्टर : सुनील यादव
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