छतरपुर: छतरपुर में प्रशासन ने PWD की करोड़ों की सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बुलडोजर का सहारा लिया। शुक्रवार को जिला प्रशासन, नगरपालिका, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए जर्जर भवनों को जमींदोज करना शुरू किया। हालांकि, स्थानीय गरीब परिवारों के बेघर होने की आशंका और हिंदू संगठनों के तीव्र विरोध के बाद प्रशासन को यह कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी।

🏚️ 10 मकानों को किया गया था चिन्हित

कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशों पर पहली चरण में शहर के मुख्य इलाकों में 10 मकानों को चिन्हित किया गया था। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने 4 भवनों को तो गिरा दिया, लेकिन इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के प्रखर भट्ट और उनके समर्थकों ने मौके पर पहुंचकर विरोध शुरू कर दिया। संगठनों का तर्क था कि कार्रवाई माफियाओं के खिलाफ होनी चाहिए, न कि उन गरीबों और बीमार लोगों के खिलाफ जो बरसों से वहां रह रहे हैं।

💰 300 करोड़ से अधिक की सरकारी संपत्ति पर कब्जा

अधिकारियों के अनुसार, छतरपुर के मुख्य बाजार में PWD की करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर अवैध कब्जा जमा हुआ है। इनमें 20 से अधिक दुकानें और 30 से अधिक भवन शामिल हैं, जो कई सालों से विवादों में हैं। PWD विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी करने के बावजूद कब्जाधारी नहीं हटे, जिसके चलते प्रशासन को बुलडोजर का रुख करना पड़ा।

🚧 विभाग का तर्क: ‘सुरक्षा और जर्जर भवन’

PWD अधिकारी आशीष भारती का कहना है कि चिन्हित भवन अत्यंत जर्जर हो चुके हैं और कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। मानसून और बारिश के मौसम को देखते हुए, किसी भी बड़ी अनहोनी को रोकने के लिए इन खतरनाक भवनों को हटाना विभाग की प्राथमिकता है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को सुलझाकर सरकारी संपत्ति को वापस हासिल करने के लिए अगला कदम क्या उठाता है।

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