चंडीगढ़ में कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी किए जाने के बाद से शहर के प्रॉपर्टी बाजार में हलचल काफी धीमी पड़ गई है, जिसका सीधा असर अब रजिस्ट्री कार्यालयों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. संपत्ति की सरकारी (Chandigarh Property News) कीमत बढ़ने के कारण खरीदारों पर स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्कों का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है, जिसके चलते लोगों ने फिलहाल जमीन या मकान खरीदने का अपना फैसला टाल दिया है और वे चंडीगढ़ के बजाय मोहाली व अन्य आसपास के इलाकों में अपने लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं.
Chandigarh Property News – सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की बात करें तो पहले रोजाना लगभग 50 से 60 लोग प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर करीब 20 से 25 के आसपास रह गई है. हालांकि प्रशासन का अपना तर्क है कि रजिस्ट्रियों की संख्या में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है, लेकिन बाजार के जानकारों और प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स का मानना है कि सीमित बजट वाले मध्यम वर्गीय खरीदारों के लिए अब खरीदारी करना काफी महंगा साबित हो रहा है.
डिप्टी कमिश्नर निशांत यादव का बयान
पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डीसी निशांत यादव ने स्पष्ट किया कि पहले कलेक्टर रेट और बाजार मूल्य में काफी अंतर था और लोग कम राशि पर रजिस्ट्रियां कराते थे. कलेक्टर रेट को मार्केट रेट के करीब लाने से सरकार को मिलने वाला स्टांप ड्यूटी राजस्व दोगुने से भी अधिक हो गया है, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता आ रही है. प्रशासन का यह मानना है इससे नकद लेन-देन पर रोक लगेगी और बाजार में व्यवस्था सुधरेगी, हालांकि खरीदारों को अब अधिक शुल्क चुकाना पड़ रहा है.


