चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा को समर्पित है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए (white sweet) इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है. नवरात्रि के इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और खास भोग लगाने से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है.

मालपुआ का भोग

मां कूष्मांडा को मालपुआ बहुत प्रिय माना जाता है. इस दिन मालपुआ बनाकर देवी को अर्पित करना शुभ होता है. इसके बाद इस प्रसाद को जरूरतमंदों में बांटना पुण्यदायक माना जाता है.

कद्दू से बने व्यंजन

मां कूष्मांडा का संबंध कद्दू (कूष्मांड) से माना जाता है. इसलिए इस दिन कद्दू से बनी सब्जी या मिठाई का भोग लगाने की परंपरा भी कई जगहों पर प्रचलित है.

फल और मिश्री

मौसमी फल, खासकर मीठे फल और मिश्री का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है. यह भोग देवी को प्रसन्न करने के साथ-साथ घर में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है.

पान और नारियल

पूजा में पान, सुपारी और नारियल चढ़ाने का भी विशेष महत्व है. इससे (white sweet) मां की कृपा बनी रहती है और घर में समृद्धि आती है.

Share.
Exit mobile version