हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है. इसका समापन 27 मार्च को होगा. मान्यता है कि (first and ashtami fast) चैत्र नवरात्रि के समय देवी दुर्गा धरती पर आती हैं औऱ अपने भक्तों के कष्ट हरती हैं. नवरात्रि के समय में भक्तों द्वारा देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों का पूजन किया जाता है. साथ ही व्रत किया जाता है.

पहले व्रत का संकल्प और कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन का व्रत मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का संकल्प लेना माना जाता है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. फिर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापना (first and ashtami fast) करें. फिर व्रत की शुरुआत करें. पहला व्रत रखने वालों को पूरे दिन अपने विचारों में शुद्धता रखनी चाहिए. यह दिन अपनी बड़ी इच्छाएं मां के सामने रखने का होता है. पूजा के समय जो अखंड ज्योत जलाई जाती है वो घर में सकारात्मकता लेकर आती है.

अष्टमी व्रत और कन्या पूजन

अष्टमी को महाष्टमी कहा जाता है. ये नवरात्रि के महत्वपूर्ण दिनों में से एक है. पहले दिन का व्रत रखने वालों के अष्टमी का दिन संकल्प पूरा करने का समय होता है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. माता पवित्रता और शांति की देवी मानी जाती है. अष्टमी व्रत के दौरान कन्या पूजन किया जाता है. कन्या पूजन का विशेष महत्व है. इसमें छोटी बच्चियों को मां का रूप मानकर भोग लगया जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि में बिना कन्या पूजन के इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है.

 

 

 

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