बोकारो। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की खनन नीति और हाल ही में लागू किए गए MMDR कानून को लेकर जोरदार हमला बोला है। बोकारो प्रवास के (Bokaro News Today) दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार द्वारा खनिजों पर लगाए गए 450 रुपये प्रति टन सेस (Cess) के औचित्य पर कड़े सवाल उठाए।
Bokaro News Today – उन्होंने कहा देश में कोयला और लौह अयस्क (आयरन ओर) की कीमतें उनके ग्रेड और गुणवत्ता के आधार पर तय होती हैं।ऐसे में अचानक प्रति टन 450 रुपये का भारी सेस लगाने से झारखंड में उत्पादित होने वाले खनिजों के दाम बहुत अधिक बढ़ जाएंगे, जिसका सीधा और घातक असर राज्य के औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ेगा।
बाबूलाल मरांडी ने खनिजों के महंगे होने के दुष्परिणामों को समझाते हुए कहा कि कोयले का मुख्य रूप से इस्तेमाल थर्मल पावर प्लांट, स्टील प्लांट तथा अन्य भारी उद्योगों में ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कच्चे माल के रूप में कोयला ही महंगा हो जाएगा, तो राज्य में बनने वाली बिजली और स्टील की उत्पादन लागत में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी।
उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि यदि झारखंड का कोयला अन्य राज्यों की तुलना में महंगा हो जाता है, तो बड़ी औद्योगिक कंपनियां सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) से खरीदारी करने के बजाय पड़ोसी राज्यों से सस्ता कोयला खरीदने का विकल्प चुन सकती हैं।
राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों पर दागे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि इस गलत निर्णय का दूरगामी असर राज्य के कुल कोयला उत्पादन, औद्योगिक विकास और स्थानीय युवाओं के रोजगार पर बेहद नकारात्मक पड़ सकता है। राज्य सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि बीते साढ़े 6 वर्षों के दौरान झारखंड में नए उद्योगों की स्थापना और निवेश आकर्षित करने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है।


