पटना। बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सब कुछ (Bihar NDA Conflict) ठीक नहीं चल रहा है। पहले आरक्षण की सीमा और जातिगत गणना के मसले पर, फिर फरक्का जल संधि और अब समान नागरिक संहिता तथा विधान परिषद के सभापति की सीट को लेकर दोनों प्रमुख घटक दलों में घमासान मचा हुआ है। विशेष रूप से यूसीसी के मुद्दे पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।
Bihar NDA Conflict – इधर बिहार विधान परिषद के सभापति के पद को लेकर भी जदयू और बीजेपी के बीच खींचतान चरम पर है। दरअसल, पूर्व में हुए समझौते के तहत बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति, दोनों ही संवैधानिक पद बीजेपी के खाते में जाने तय हुए थे। वर्तमान में विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह हैं। ऐसे में बीजेपी उन पर पद से इस्तीफा देने का लगातार दबाव बना रही है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने 17 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है, यानी इस तिथि तक सभापति को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ सकता है।
फरक्का जल संधि पर जदयू का आक्रामक रुख
इसके अलावा जदयू ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दशकों पुरानी ‘फरक्का जल संधि’ को रद्द या संशोधित करने का चौतरफा दबाव बनाया है। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा संवेदनशील मुद्दे को लेकर बिहार के हर जिले में व्यापक जनसंपर्क यात्रा निकाल रहे हैं, जिसे ‘फरक्का यात्रा’ नाम दिया गया है। इन बढ़ते राजनीतिक मतभेदों के बीच मंगलवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अचानक हुई बंद कमरे में मुलाकात को भी जदयू-बीजेपी के बीच गहराते इस विवाद की कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।
