बिहार सरकार ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और सरकारी आर्थिक मदद पाने वाले संस्थानों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सहायता प्राप्त (physical verification of madrassas) मदरसों और संस्कृत स्कूलों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
📊 ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल पर देनी होगी पूरी जानकारी
शिक्षा विभाग ने सभी मदरसों, संस्कृत स्कूलों और अल्पसंख्यक स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे अपने छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का पूरा विवरण राज्य सरकार के ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। निरीक्षण का कार्य ब्लॉक स्तर पर गठित तीन-सदस्यीय समितियों द्वारा किया जाएगा, जो जमीनी स्तर पर संस्थानों के कामकाज का मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेंगी।
🔢 राज्य में मदरसों की स्थिति
आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 1,937 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे हैं जिन्हें शिक्षा विभाग द्वारा वित्तीय सहायता मिलती है। वहीं, राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत 3 हजार से अधिक मदरसे संचालित हैं, जिनमें लगभग 7 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और 15 हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। इस निरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खजाने का उपयोग सही दिशा में हो रहा है।
🎓 14 विश्वविद्यालयों में प्रो-वाइस चांसलर की नियुक्ति
शिक्षा क्षेत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत, बिहार सरकार ने राज्य की 14 प्रमुख यूनिवर्सिटीज (जैसे पटना यूनिवर्सिटी, पूर्णिया यूनिवर्सिटी, तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी आदि) में प्रो-वाइस (physical verification of madrassas) चांसलर की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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योग्यता: उम्मीदवार के पास प्रोफेसर के रूप में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना अनिवार्य है।
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आयु सीमा: आवेदन की अंतिम तिथि तक अधिकतम आयु 67 वर्ष निर्धारित की गई है।
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आवेदन: पात्र शिक्षाविद 1 जुलाई की शाम 6 बजे तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
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