पटना ): तीन दशक (30 वर्ष) के लंबे अंतराल के पश्चात भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उसके पारंपरिक और अभेद्य गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में करारी हार का सामना करना पड़ा है। बिहार में बदलाव की ऐसी तीव्र बयार चली कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गृह क्षेत्र बांकीपुर ही ढह गया। इस हाई-प्रोफाइल (Bankipur by election result) सीट पर पहली बार चुनावी मैदान में उतरी प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भाजपा को प्रत्यक्ष शिकस्त दी है।
एक सीट के उपचुनाव की गूंज पटना से दिल्ली तक
बिहार की एकमात्र बांकीपुर विधानसभा सीट पर आयोजित इस उपचुनाव में भाजपा की पराजय की गूंज पटना के राजनीतिक गलियारों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है। इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कई केंद्रीय मंत्रियों तथा (Bankipur by election result) संपूर्ण बिहार कैबिनेट ने बांकीपुर में लगातार कैंप किया, किंतु शीर्ष नेतृत्व की भारी-भरकम मौजूदगी के बावजूद भाजपा अपनी सीट बचाने में पूरी तरह विफल रही।
नीट आंदोलन, भरत तिवारी एनकाउंटर और यूजीसी विवाद का दिखा नकारात्मक असर
बांकीपुर में भाजपा की इस बड़ी हार के पीछे कई महत्वपूर्ण स्थानीय व नीतिगत कारण उभरकर सामने आए हैं—
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छात्रों में भारी आक्रोश: नीट (NEET) पेपर लीक और उसके बाद हुए देशव्यापी छात्र आंदोलनों का चुनाव परिणाम पर गहरा असर पड़ा। इसके अतिरिक्त यूजीसी (UGC) नियमों को लेकर अगड़ी जातियों के युवाओं में व्याप्त नाराजगी भी मतदान में साफ दिखाई दी।
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भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: भरत तिवारी के विवादित एनकाउंटर को लेकर जनता के एक बड़े वर्ग में गहरा असंतोष था, जिसने सम्राट चौधरी नीत राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े किए।
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जनता से जुड़े जमीनी मुद्दे: प्रशांत किशोर लगातार शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों पर जोर देते रहे, जिससे युवाओं और आम नागरिकों का सीधा जुड़ाव हुआ।
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