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    Home » बड़ी चेतावनी: 11 युद्धों का कड़वा अनुभव और अमेरिका की वो ‘एक भूल’, क्या डोनाल्ड ट्रंप फिर उसी रास्ते पर हैं?

    बड़ी चेतावनी: 11 युद्धों का कड़वा अनुभव और अमेरिका की वो ‘एक भूल’, क्या डोनाल्ड ट्रंप फिर उसी रास्ते पर हैं?

    March 27, 2026 विदेश 4 Mins Read
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    ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका में संसद की शक्तियों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. क्या राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के युद्ध शुरू कर सकते हैं. यह सवाल अब फिर से चर्चा में है. अमेरिका ने 28 फरवरी को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था. इसके बाद तेल की कीमतें बढ़ गईं और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी. युद्ध के दौरान ही ईरान के मिनाब में एक स्कूल पर हमले में बच्चों की मौत हो गई. इस खबर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की आलोचना भी हुई.

    अमेरिकी संविधान के मुताबिक, युद्ध की घोषणा का अधिकार कांग्रेस के पास होता है. लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के हमले शुरू कर दिए और इसे सैन्य अभियान कहा. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान से तत्काल खतरा था, इसलिए हमला जरूरी था. हालांकि, उनके पूर्व अधिकारियों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं.

    85 साल पहले औपचारिक युद्ध लड़ा गया

    अमेरिका ने आखिरी बार 8 दिसंबर 1941 को औपचारिक रूप से युद्ध घोषित किया था, जब पर्ल हार्बर हमले के बाद जापान के खिलाफ जंग शुरू हुई थी. इसके बाद से ज्यादातर मामलों में कांग्रेस ऑथराइजेशन फॉर यूज ऑफ मिलिट्री फोर्स (AUMF) देती रही है, जिससे सेना को सीमित कार्रवाई की अनुमति मिलती है. खाड़ी युद्ध, अफगानिस्तान युद्ध और इराक युद्ध में कांग्रेस ने ऐसी ही मंजूरी दी थी.

    हालांकि कई बार अमेरिकी राष्ट्रपति ने बिना इस मंजूरी के भी बड़े सैन्य ऑपरेशन किए हैं. अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप ने फिर वही गलती दोहराई है, जिसकी वजह से अमेरिका 11 बार जंग में फंस चुका है. आइए अमेरिका की उन 11 सैन्य कार्रवाईयों को जानते हैं, जिसमें कांग्रेस की मंजूरी नहीं ली गई.

    1. फिलीपींस-अमेरिका युद्ध (1899-1902): राष्ट्रपति विलियम मैककिनले ने औपचारिक युद्ध की मंजूरी नहीं ली. 3 साल चले युद्ध में 4,200 अमेरिकी सैनिक, 20,000 फिलीपीन लड़ाके और करीब 2 लाख नागरिक मारे गए.
    2. कोरियाई युद्ध (1950-53): राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने इसे पुलिस एक्शन बताया और कांग्रेस से अनुमति नहीं ली. इस युद्ध में 37,000 अमेरिकी सैनिक और कुल मिलाकर करीब 50 लाख लोग मारे गए.
    3. वियतनाम युद्ध (1955-75): शुरुआत में मंजूरी मिली थी, लेकिन बाद में खत्म हो गई. इसके बावजूद राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने बमबारी जारी रखी. इस युद्ध में 58,220 अमेरिकी सैनिक मारे गए.
    4. कंबोडिया में बमबारी (1969-73): निक्सन ने गुप्त रूप से बमबारी करवाई और कांग्रेस को बताया भी नहीं. इस दौरान 5.4 लाख टन बम गिराए गए और 1.5 से 5 लाख नागरिक मारे गए.
    5. ग्रेनेडा हमला (1983): राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने बिना मंजूरी हमला किया. यह ऑपरेशन 8 दिन चला, जिसमें 19 अमेरिकी सैनिक और 24 स्थानीय लोग मारे गए.
    6. पनामा हमला (1989): राष्ट्रपति जॉर्ड बुश ने ऑपरेशन जस्ट कॉज शुरू किया. इसमें पनामा के नेता को पकड़ लिया गया. 23 अमेरिकी सैनिक और करीब 1,000 लोग मारे गए.
    7. यूगोस्लाविया बमबारी (1999): राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के समय NATO के साथ मिलकर हमला किया गया. इसमें 1,000 से ज्यादा सैनिक और करीब 500 नागरिक मारे गए.
    8. लीबिया हमला (2011): राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नाटो फोर्सेज के साथ कार्रवाई की, लेकिन कांग्रेस से मंजूरी नहीं ली. इस पर काफी विवाद हुआ. UN सिक्योरिटी काउंसिल ने एक रिजॉल्यूशन के जरिए लीबिया पर मिलिट्री एक्शन के जायज बताया.
    9. यमन में हमले: 2023 से हूती विद्रोहियों पर हमले किए गए. डोनाल्ड ट्रंप और बाइडेन प्रशासन ने बिना मंजूरी कार्रवाई की. 2025 में कम से कम 224 नागरिक मारे गए.
    10. ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला (2025): ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत ट्रंप ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के हमला किया. इस फैसले की कई नेताओं ने आलोचना की. 1,000 से ईरानी नागरिक मारे गए.
    11. वेनेजुएला में कार्रवाई (2026): 3 जनवरी को अमेरिका ने हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाया. इस ऑपरेशन में करीब 75 लोग मारे गए और 7 अमेरिकी सैनिक घायल हुए.

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कांग्रेस ने धीरे-धीरे युद्ध के अधिकार राष्ट्रपति को दे दिए हैं. आज स्थिति यह है कि राष्ट्रपति अक्सर अपनी शक्तियों का विस्तार करते हुए सैन्य कार्रवाई कर देते हैं और कांग्रेस बाद में प्रतिक्रिया देती है. हालांकि बिना मंजूरी के युद्ध में कूदने के लंबे और गंभीर परिणाम हो सकते हैं. अगर इन 11 मामलों में पहले कांग्रेस से मंजूरी ली जाती, तो कुछ युद्धों को हरी झंडी मिल जाती, कुछ में देरी होती या शर्तें लगतीं और कुछ जंग शायद शुरु भी नहीं होते.

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