चंडीगढ़ : पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक गठबंधन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी में उनके छात्र संगठनों ने एक चौंकाने वाला गठबंधन किया है। पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) के चुनावों से ठीक एक दिन पहले रविवार को भाजपा समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और अकाली दल समर्थित स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SOI) ने मिलकर चुनाव लड़ने की आधिकारिक घोषणा की।

 पंजाब यूनिवर्सिटी में आज वोटिंग 

पंजाब विश्वविद्यालय परिसर छात्र परिषद (PUCSC) चुनाव के लिए मतदान जारी है। SOI ने अध्यक्ष पद समेत अन्य पदों पर ABVP के उम्मीदवारों को खुला समर्थन देने और अपने पूरे कैडर व (ABVP and SOI came together) समर्थकों को उनके पक्ष में जुटाने का फैसला किया है।

कांटे की टक्कर में गेम-चेंजर साबित हो सकता है फैसला

 मतदान से ठीक पहले एक मजबूत और स्थापित छात्र संगठन का समर्थन मिलना ABVP के लिए चुनावी समीकरणों को पक्ष में मोड़ने वाला साबित हो सकता है। प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में कड़े मुकाबले को देखते हुए SOI के वोटों का ट्रांसफर होना ABVP को निर्णायक बढ़त दिला सकता है।

 बीजेपी-अकाली दल के मुख्य गठबंधन पर क्या होगा इसका असर?
    • मुख्य दलों में अब भी दूरी: अकाली दल और भाजपा वर्तमान में राज्य स्तर पर अलग-अलग राह पर चल रहे हैं, लेकिन दोनों दलों के छात्र संगठनों का यह सहयोग राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

    • सहमति की गुंजाइश: हालांकि छात्र संगठनों के हाथ मिलाने का यह अर्थ नहीं है कि मूल पार्टियों के मतभेद पूरी तरह सुलझ गए हैं, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि दोनों दलों के बीच भविष्य में चुनावी तालमेल की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

       

 

 

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