राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में संचालित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीते एक सप्ताह से लगातार विरोध जारी है. बिना मान्यता के भारतीय सेना के छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत प्रवेश देने के बाद मान्यता को (big uproar over BSC nursing admission) लेकर छात्रों ने विरोध शुरू किया, तो 30 कश्मीरी छात्रों सहित 34 स्टूडेंट्स को निलंबित किया गया.
इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा आरोप लगाया गया कि सरकार यूनिवर्सिटी को मानता नहीं दे रही है. इसी बीच लगातार 2 दिनों तक यूनिवर्सिटी में छात्रों के बीच आपस में संघर्ष की स्थिति बनी रही और बीती रात से छात्रों का यूनिवर्सिटी से पलायन करने का दौर जारी है.
big uproar over BSC nursing admission – पलायन करने वाले अधिकांश स्टूडेंट्स बिहार और जम्मू कश्मीर के हैं, जो यूनिवर्सिटी छोड़कर जा चुके हैं. वहीं जिन लोगों ने बीएससी नर्सिंग में प्रवेश लिया था. वह अभी अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
किस योजना के तहत जम्मू-कश्मीर के छात्रों को मिला था प्रवेश?
चित्तौड़गढ़ के गंगरार में मेवाड़ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बीएससी नर्सिंग के जम्मू-कश्मीर के 30 स्टूडेंट्स समेत 33 स्टूडेंट्स को सस्पेंड कर दिया है. जम्मू-कश्मीर के ये स्टूडेंट्स भारतीय सेना की सद्भावना योजना के तहत राजस्थान में पढ़ने आए थे और अब इनका चार साल का कोर्स पूरा होने को है. तय कार्यक्रम के अनुसार इन्हें प्रैक्टिकल के लिए अप्रैल में जम्मू-कश्मीर जाना था, लेकिन अब कुछ भी साफ नहीं है.
नहीं है नर्सिंग काउंसिल की मान्यता
जिस बैच में जम्मू-कश्मीर के छात्रों को दाखिला मिला है. उस बैच की डिग्री को राजस्थान नर्सिंग काउंसिल की मान्यता ही नहीं मिली है. इसके लिए ये छात्र-छात्राएं पिछले तीन साल से प्रदर्शन कर रहे हैं और यूनिवर्सिटी इन्हें या तो आश्वासन दे रही है या सस्पेंड कर रही है.
क्या है पूरा मामला?
जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग जिलों से 30 स्टूडेंट्स (8 छात्राएं और 22 छात्र) भारतीय सेना की सद्भावना योजना के तहत पढ़ाई के लिए राजस्थान आए थे. स्टूडेंट्स का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने साल 2022 में एडमिशन के समय सरकारी अनुमति को लेकर गलत जानकारी दी थी. इन स्टूडेंट्स के अनुसार बीएससी नर्सिंग कोर्स संचालित करने के लिए सरकार की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिला था, इसके बावजूद उनका एडमिशन कर लिया गया.


