भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बहुत बड़ा और कड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। भोपाल की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुनवाई पूरी करते हुए छह साल बाद अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी पूर्व अखबार मालिक प्यारे मियां को विभिन्न गंभीर अपराधों के तहत दोषी करार देते हुए कुल 10 बार आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इनमें से 8 सजाएं ऐसी हैं, जिनमें दोषी को अपने प्राकृतिक जीवन के अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा, जबकि दो अन्य सामान्य उम्रकैद की सजाएं शामिल हैं।
विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने अपराधों को माना क्रूर, सहयोगी राबिया बी को 20 साल की कैद
मामले की सुनवाई करने वाली विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने इस पूरे कृत्य को बेहद गंभीर, क्रूर और असहनीय करार दिया है। कड़े रुख अपनाते हुए अदालत ने मुख्य आरोपी प्यारे मियां पर कुल 77 लाख 64 हजार रुपये का भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा, इस घिनौने अपराध में मुख्य आरोपी की मदद करने वाली उसकी सहयोगी राबिया बी को भी दोषी मानते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने अपने फैसले में पीड़ित मासूम बच्चियों के पुनर्वास के लिए भी विशेष आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने के निर्देश दिए हैं।
नौकरी और 10 हजार मासिक वेतन का लालच देकर मासूमों को जाल में फंसाता था आरोपी
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे पी. एन. सिंह राजपूत के अनुसार, दोषी प्यारे मियां वर्ष 2014 से लगातार गरीब परिवारों की नाबालिग बच्चियों को अपना निशाना बना रहा था। वह पीड़ित बच्चियों और उनके परिजनों से संपर्क साधकर उन्हें अच्छी नौकरी दिलाने और हर महीने 10,000 रुपये तक की कमाई का झूठा लालच देता था। उसकी सहयोगी राबिया बी इन मासूम बच्चियों को बहला-फुसलाकर प्यारे मियां तक पहुंचाने का काम करती थी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बच्चियों से खुद को ‘अब्बू’ कहलवाता था। परिवारों का भरोसा जीतने के लिए वह उनके घरों तक जाता था और स्थानीय धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय रूप से शामिल होता था ताकि किसी को उस पर शक न हो।
जुलाई 2020 में पुलिस गश्त के दौरान खुला था राज, शाहपुरा के फ्लैट में दी जाती थी पार्टी
यह पूरा सनसनीखेज मामला जुलाई 2020 में उस वक्त उजागार हुआ, जब रातीबड़ थाना पुलिस को नियमित गश्त के दौरान कुछ नाबालिग बच्चियां संदिग्ध और नशे की हालत में घूमती हुई मिलीं। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ और काउंसलिंग के दौरान डरी-सहमी बच्चियों ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उन्हें एक लड़की का जन्मदिन मनाने के बहाने भोपाल के पॉश शाहपुरा इलाके स्थित एक फ्लैट में बुलाया गया था। वहां पहुंचने के बाद बच्चियों को जबरन शराब पिलाई गई और उनके साथ गंभीर यौन अपराध किए गए। बच्चियों के इन बयानों के आधार पर पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू की थी, जिसके बाद उस फ्लैट से भारी मात्रा में शराब और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद हुई थीं।
फ्लैट से मिले थे हिडन कैमरे और पिस्टल, ब्लैकमेल करने का था पूरा षड्यंत्र
पुलिस जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया था कि उस फ्लैट के भीतर हिडन कैमरे और एक अवैध पिस्टल भी छिपाई गई थी। आरोप था कि उन गुप्त कैमरों के जरिए बच्चियों के आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे और फिर उन्हीं वीडियो के आधार पर उन्हें लगातार ब्लैकमेल किया जाता था। पीड़िताओं को हथियारों का भय दिखाकर डराने-धमकाने के गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। तमाम साक्ष्यों को संकलित करने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा था।
गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रीनगर तक भागा था आरोपी, पुलिस ने ऐसे दबोचा
अपराध सामने आने के बाद जब पुलिस ने शिकंजा कसा, तो आरोपी प्यारे मियां गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार फरार चल रहा था। उसके देश छोड़कर विदेश भाग जाने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने तुरंत लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया था। जानकारी के मुताबिक, वह शातिर तरीके से आष्टा में अपनी गाड़ी छोड़कर टैक्सी के जरिए इंदौर पहुंचा, और फिर वहां से विमान पकड़कर दिल्ली के रास्ते श्रीनगर जा पहुंचा। जैसे ही पुलिस को उसकी लोकेशन श्रीनगर में मिलने की पुख्ता सूचना मिली, स्थानीय पुलिस की मदद से उसे वहां धर दबोचा गया। जुलाई 2020 में गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल लाया गया था।
पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास के लिए 12 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के निर्देश
अदालत ने अपने इस फैसले में पीड़िताओं के भविष्य और उनके पुनर्वास का विशेष ध्यान रखा है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि तीन मुख्य पीड़िताओं को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, जिससे कुल 12 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पीड़िताएं इस बड़े मानसिक आघात और अपराध के प्रभाव से उबर सकें तथा समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
पीड़ित पक्ष ने जताई संतुष्टि, अवैध संपत्तियों पर भी चल चुका है प्रशासन का बुलडोजर
अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के आने के बाद पीड़ित पक्ष और उनके कानूनी सलाहकारों ने गहरा संतोष व्यक्त किया है। उनका मानना है कि देश की न्यायपालिका पर उनका अटूट भरोसा था, और यह कड़ा फैसला भविष्य में नाबालिगों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों के मामलों में एक मजबूत नजीर बनेगा। गौरतलब है कि मामला सामने आने के तुरंत बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्यारे मियां से जुड़ी कई अवैध संपत्तियों और इमारतों को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया था। छह लंबी चली कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला समाज में बच्चों की सुरक्षा और त्वरित न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करता है।


