राजस्थान के भिवाड़ी की फैक्ट्री में सोमवार को हुए धमाकों ने न सिर्फ 7 लोगों की जान ली, बल्कि सिस्टम की पोल भी पूरी तरह से खोल कर रख दी है. कपड़े की फैक्ट्री में पटाखे बनाए जा रहे थे. इसमें करीब एक (Bhiwadi Factory Blast) दर्जन लोग काम कर रहे थे. ये धमाके के बाद फैली आग के गुबार में घिर गए. इनमें से कुछ ही लोग सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे, जबकि 7 की मौके पर ही जलकर मौत हो गई.
Bhiwadi Factory Blast – जले हुए शवों को टपूकड़ा स्थित सामुदायिक चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया गया है. डीएनए रिपोर्ट के बाद इनका पोस्टमार्टम कराया जाएगा. इसके बाद परिजनों को सौंपा जाएगा. धमाका इतना तेज था कि बिल्डिंग का एक शटर उड़कर पड़ोस की फैक्ट्री में जा गिरा.
कपड़े की फैक्ट्री में पटाखे
यह फैक्ट्री राजेंद्र सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड है. कागजों में इसे रेडीमेड गारमेंट की फैक्ट्री बताया गया था, लेकिन अंदर पटाखे बनाए जा रहे थे. हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान सुमंत पुत्र शिव पासवान, मिंटू पुत्र सिकंदर पासवान, अजीत पुत्र सुरेंद्र, रवि पुत्र राजदेव, श्याम पुत्र जयदेव, अंबरीश पुत्र कृष्णलाल और शशिभूषण के रूप में हुई है. सभी लोग बिहार के मोतिहारी के रहने वाले थे.
बिना एनओसी चल रही थी फैक्ट्री
आमतौर पर किसी भी फैक्ट्री को चलाने से पहले 38 विभागों से एनओसी लेनी पड़ती है, तब जाकर काम शुरू होता है. लेकिन इस मामले में खुलासा हुआ कि न तो प्रशासन से कोई अनुमति ली गई थी और न ही किसी तरह की एनओसी थी. यह भी सामने आया कि फैक्ट्री करीब एक महीने से चल रही थी और यहां नाबालिगों से भी काम कराया जा रहा था.


