बीजेपी का ‘डबल इंजन’ गवर्नेंस मॉडल, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही पार्टी का शासन होता है, ने पहले ही उत्तर प्रदेश, ओडिशा और असम की आर्थिक दिशा बदल दी है. BJP शासन में इन तीनों राज्यों में कैपिटल एक्सपेंडिचर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. जहां उत्तर प्रदेश में कैपेक्स पिछली सरकारों के 15.7 फीसदी से (new impetus to economy) बढ़कर 19.2 फीसदी हो गया. वहीं दूसरी ओर ओडिशा में यह 12.3 फीसदी के मुकाबले 18.7 फीसदी रहा. अगर बात असम की करें तो पिछली सरकारों के 0.4 फीसदी के मुकाबले में बढ़कर 21.5 फीसदी पर पहुंच गया.
इस चुनावी नतीजे के साथ ही ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC का 15 साल से ज्यादा पुराना शासन समाप्त हो गया है. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल अब उस स्थिति में आ गया है, जिसे Elara Capital के विश्लेषक भारत के “कैपिटल एक्सपेंडिचर के महाअभियान” (Capex juggernaut) का अगला चरण बता रहे हैं, जो अब पूरब की ओर बढ़ रहा है.
अब बंगाल की इकोनॉमी को मिलेगी रफ्तार?
नई सरकार को आर्थिक मोर्चे पर जो कमजोरी विरासत में मिली है, वह बहुत साफ है. वित्त वर्ष 2018 और 2025 के बीच भारत की GDP में पश्चिम बंगाल का योगदान 28 बेसिस पॉइंट कम हो गया, जबकि इसी दौरान उत्तर प्रदेश का योगदान 20 बेसिस पॉइंट बढ़ गया. 2012 से अब तक लगभग 6,888 कंपनियां राज्य छोड़कर चली गई हैं. BJP के फैक्टर सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर का मकसद कंपनियों के इस पलायन को रोकना है.
new impetus to economy – पार्टी के घोषणापत्र में इसके लिए पूरी योजना बताई गई है, जिसमें ताजपुर और कुलपी में गहरे पानी वाले पोर्ट, कोलकाता मेट्रो का पूरा होना, 61 रुके हुए रेल प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करना, ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण सिंगूर जगह पर एक इंडस्ट्रियल पार्क बनाना, पुरुलिया, मालदा और बालुरघाट में नए हवाई अड्डे बनाना, और जूट उद्योग को फिर से जिंदा करने के लिए खास प्रयास करना शामिल हैं.
