बस्तर: बस्तर के ग्रामीण इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में दरभा क्षेत्र में ट्रैक्टर पलटने से 15 लोग घायल हुए थे, वहीं लोहंडीगुड़ा थाना क्षेत्र के ढाबामारी गांव में शादी से लौट रही एक पिकअप वाहन के पलटने से 2 ग्रामीणों की मौत हो गई और 37 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

🚚 मालवाहक वाहनों पर कार्रवाई के दावे खोखले

परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन समय-समय पर मालवाहक वाहनों में सवारी ढोने को गैरकानूनी बताते हुए कार्रवाई का दावा तो करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। कार्रवाई के बावजूद ग्रामीण इलाकों में आज भी पिकअप और ट्रैक्टरों में क्षमता से अधिक लोगों को ढोने का सिलसिला जारी है। ये घटनाएं केवल महज हादसे नहीं हैं, बल्कि ये ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल परिवहन प्रणाली की कड़वी सच्चाई भी बयां करती हैं।

🚶‍♂️ सार्वजनिक परिवहन का अभाव बना कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि इन हादसों के पीछे का मुख्य कारण गांवों में नियमित सार्वजनिक परिवहन का न होना है। जब ग्रामीणों के पास सुरक्षित यात्रा का कोई विकल्प नहीं बचता, तो वे जान जोखिम में डालकर मालवाहक वाहनों में सफर करने को मजबूर होते हैं। बस्तर ASP माहेश्वर नाग के अनुसार, प्रशासन यातायात जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन जागरूकता के साथ-साथ सुलभ परिवहन व्यवस्था समय की मांग है।

❓ सबसे बड़ा सवाल: कब सुधरेगी व्यवस्था?

हर बड़े हादसे के बाद जांच और भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन ग्रामीणों के लिए सुरक्षित यात्रा का सपना आज भी अधूरा है। बस्तर के हजारों ग्रामीण अब भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं कि आखिर कब उन्हें सुरक्षित परिवहन की सुविधा मिलेगी और कब उन्हें अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करने से मुक्ति मिलेगी।

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