बरनाला के लिए कल का दिन बेहद ऐतिहासिक होने वाला है। नगर निगम के इतिहास में पहली बार शहर को अपना निर्वाचित मेयर मिलने जा रहा है। 11 जून को नगर निगम स्थित लाइब्रेरी हॉल में नवनिर्वाचित पार्षदों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें मेयर के नाम पर मुहर लगेगी। सत्ताधारी पक्ष के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके (Barnala will get first mayor) चलते मेयर की कुर्सी पर उनकी जीत लगभग तय है।

Barnala will get first mayor – इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि सत्ता पक्ष केवल ‘मेयर’ का चुनाव करवा रहा है, जबकि ‘सीनियर डिप्टी मेयर’ और ‘डिप्टी मेयर’ के पदों को फिलहाल खाली रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, इन पदों के लिए कई दावेदारों के बीच खींचतान चल रही थी, जिससे पार्टी के भीतर बगावत का खतरा पैदा हो गया था। आंतरिक कलह को थामने और संगठन की एकता बनाए रखने के लिए ही शीर्ष नेतृत्व ने यह समझदारी भरा कदम उठाया है।

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इस रणनीति के पीछे आगामी विधानसभा चुनावों की आहट साफ महसूस की जा रही है। ऐसे नाजुक समय में सत्ता पक्ष किसी भी सूरत में घर में फूट नहीं पड़ने देना चाहता। पार्टी नेतृत्व हर छोटे-बड़े फैसले को बेहद सावधानी और फूंक-फूंककर ले रहा है, ताकि गुटबाजी से बचा जा सके।

 बरनाला की नई उम्मीदें और विकास का सपना

बरनाला के नगर कौंसिल से नगर निगम बनने का सफर एक बड़ी उपलब्धि है। शहरवासियों को अब नए मेयर से ढेर सारी उम्मीदें हैं। लोगों का मानना है कि निगम बनने के बाद सड़कों की हालत, सीवरेज व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और शहर की सफाई व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं में तेजी से सुधार होगा और बरनाला विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

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