आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने हाल ही में पार्टी को झटका देकर पाला बदल लिया. जिसमें राघव चड्ढा, स्वाति मालिवाल, हरभजन सिंह समेत अन्य शामिल थे. 6 सांसद अकेले पंजाब से थे. इस बड़ी बगावत के बाद पंजाब में अब बलवीर सिंह सीचेवाल ही इकलौते राज्यसभा सदस्य बचे हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ने से इनकार कर दिया था.
इस बीच जालंधर जिले के पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् और आध्यात्मिक नेता सीचेवाल का रविवार (26 अप्रैल) को बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से क्या पता था और उन्होंने बगावत करने से इनकार क्यों किया. उन्होंने न सिर्फ पार्टी छोड़ने से इनकार किया, बल्कि ये भी बताया कि उन्हें भी इस मिशन में शामिल होने का न्योता मिला था, हालांकि उन्होंने ठुकरा दिया.
‘विक्रम साहनी का फोन आया था’
मीडिया से बात करते हुए बलवीर सिंह सीचेवाल ने बताया कि दलबदल से पहले उनसे सीधे संपर्क किया गया था. उन्होंने बताया कि विक्रम साहनी का उन्हें फोन आया था. उन्होंने बताया ‘विक्रम साहनी ने फोन किया. उन्होंने कहा कि वो एक स्वतंत्र समूह बना रहे हैं और कई लोगों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं. उन्होंने मुझसे भी हस्ताक्षर करने को कहा’.
‘हस्ताक्षर करने वालों में विश्वविद्यालय वाला भी शामिल’
इसके आगे सीचेवाल ने कहा कि उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था और कहा था कि मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं . इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि साहनी ने उन्हें बताया था कि हस्ताक्षर करने वाले कई सदस्यों में “विश्वविद्यालय वाला” भी शामिल है. उनका इशारा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल की तरफ था. जो बीते शुक्रवार (24 अप्रैल) को हुए पार्टी बदलने के ऐलान के दौरान राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ मंच पर मौजूद थे.
चाय पर चर्चा का मिला ऑफर’
इसके साथ ही सीचेवाल ने एक और दिलचस्प बात बताई.उन्होंने बताया कि 16 से 18 अप्रैल के संसद सत्र के दौरान उन्हें चाय पर बैठकर बातचीत का न्योता भी मिला था. उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा ने उनसे कहा कि बाबा जी, आइए हम आपको चाय पिलाते हैं, बैठते हैं. इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि आप लोग ही पी लीजिए.
उन्होंने बताया कि यह पहली बार था जब उन्हें चाय के लिए बुलाया गया. इससे पहले कभी नहीं. वहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी दलबदल को लेकर कोई चर्चा हुई थी. इसका जवाब देते हु उन्होंने कहा कि नहीं, किसी ने नहीं की. उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा कहता है, तो वह झूठ बोल रहा है.
चड्ढा और पाठक पर क्या बोले सीचेवाल
सीचेवाल ने पंजाब में राघव चड्ढा और संदीप पाठक की भूमिकाओं और उनकी प्रमुखता के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा, ‘मैं विशेष रूप से संदीप पाठक और राघव चड्ढा के बारे में जानकर बहुत हैरान था, क्योंकि पंजाब में दोनों के पास राज्य स्तर की पूरी जिम्मेदारी थी. संदीप पाठक पार्टी की देखरेख करते थे, और प्रशासनिक पक्ष की जिम्मेदारी लगभग दो से तीन साल तक राघव चड्ढा के पास थी’.
उन्होंने आगे कहा ‘उस समय वे पंजाब के सर्वोच्च नेता थे और प्रशासन की, विशेषकर अधिकारियों की, निगाहें मकान संख्या 50 पर टिकी थीं. चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित मकान संख्या 50 चड्ढा का आवास था . वैसे तो यह पंजाब के मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय-सह-अतिथिगृह है’. वहीं पंजाब में पाला बदलने वाले नेताओं के घरों पर गद्दार लिखे जाने पर उन्होंने गुरबाणी का हवाला देते हुए कहा, नानक फिक्का बोलिए, तन मन फिक्का होए. यानी कड़वे शब्द बोलने से खुद का मन भी कठोर हो जाता है.
कौन हैं बलबीर सिंह सीचेवाल
बलबीर सिंह सीचेवाल का जन्म 2 फरवरी 1962 को हुआ था. 64 साल के बलवीर सिंह सीचेवाल जालंधर जिले से ताल्लुक रख्ते हैं. वो पर्यावरणविद् और राजनीतिज्ञ हैं. कि 2022 में राज्यसभा पहुंचे सीचेवाल अपने सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने काली बेईं नदी की सफाई के लिए बड़ा अभियान चलाया था. 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था. सात सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब सीचेवाल पंजाब से AAP के इकलौते राज्यसभा सदस्य रह गए हैं, जबकि दिल्ली से संजय सिंह और एनडी गुप्ता पार्टी के साथ हैं. सात सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब सीचेवाल पंजाब से AAP के इकलौते राज्यसभा सदस्य रह गए हैं.
