आयुर्वेद में माना जाता है कि नवजात शिशु का शरीर बहुत कोमल और संवेदनशील होता है, इसलिए उसकी देखभाल में इस्तेमाल होने वाली हर चीज का प्राकृतिक और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है. इसलिए (Baby Massage Oil) दादी-नानी से लेकर आयुर्वेद भी बच्चे की मालिश के लिए लाल तेल इस्तेमाल होने की सलाह देते हैं. शिशु की मालिश वाले लाल तेल को खास जड़ी-बूटियों को मिलाकर तैयार किया जाता है.

शंखपुष्पी

शंखपुष्पी को आयुर्वेद में मस्तिष्क टॉनिक माना जाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, फ्लेवोनॉयड्स और अल्कलॉइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शिशु के मानसिक विकास में मदद करते हैं. ये नर्वस सिस्टम (Baby Massage Oil) को शांत रखता है, जिससे बच्चे को बेहतर नींद आती है और चिड़चिड़ापन कम होता है.

माशा (उड़द दाल)

माशा यानी उड़द दाल प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होती है. यह शिशु की मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होती है. लाल तेल में इसका उपयोग शरीर को ताकत देने और त्वचा को पोषण प्रदान करने के लिए किया जाता है.

रतनजोत

रतनजोत एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है जो तेल को लाल रंग देने के साथ-साथ औषधीय गुण से भी भरपूर होती है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं. ये शिशु की त्वचा को संक्रमण से बचाता है, त्वचा को मुलायम बनाता है और किसी भी प्रकार की सूजन या जलन को कम करने में मदद करता है.

तिल का तेल

तिल का तेल इस लाल तेल का सबसे जरूरी इंग्रिडिंयट होता है . जिसमें विटामिन E, K, ओमेगा फैटी एसिड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह त्वचा को गहराई से पोषण देता है, नमी बनाए रखता है और हड्डियों को मजबूत करता है. तिल का तेल शरीर में गर्माहट पैदा करता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शिशु का संपूर्ण विकास भी तेज होता है.

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