चंडीगढ़भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने कहा कि जालंधर की माननीय अदालत का हालिया आदेश किसी भी तरह से अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि यह मात्र एक अंतरिम आदेश है, जो पूरी तरह मान सरकार के नियंत्रण वाली फॉरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस आदेश को लेकर कुछ लोग (AAP told white lie) जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यह न तो दोष सिद्ध करता है और न ही किसी तथ्य का अंतिम निर्धारण करता है।

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चुघ ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि जिस फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर यह अंतरिम आदेश पारित हुआ, उसमें न तो चेन ऑफ कस्टडी का कोई उल्लेख है, न ही टेंपरिंग की जांच का विवरण, न रिपोर्ट को चुनौती देने का अवसर दिया गया और न ही किसी प्रकार की प्रक्रिया पर अदालत में कोई विस्तृत चर्चा हुई। न कोई सामने का गवाह आया, न किसी पक्ष का जवाब रिकॉर्ड पर लिया गया, और बिना किसी पारदर्शिता के निष्कर्ष घोषित कर दिया गया।

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AAP told white lie – तरुण चुघ ने कहा कि सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि यदि दिल्ली विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड से वीडियो ही तलब नहीं किया गया, तो फिर यह जांच किस वीडियो की और किस स्रोत की की गई। उन्होंने कहा कि विधानसभा के पटल पर हुई कार्यवाही एक आधिकारिक रिकॉर्ड होती है क्योंकि आप नेता आतिशी ने विधानसभा में गुरुओं का अपमान किया और उसे दरकिनार कर किसी अन्य सामग्री पर निष्कर्ष निकालना न्यायिक प्रक्रिया की आत्मा के विपरीत है।

 

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