मुंबई: दूरदर्शन के लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक ‘रामायण’ में लक्ष्मण का किरदार निभाकर घर-घर में अपनी खास पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता सुनील लहरी ने निर्देशक नितेश तिवारी की बहुचर्चित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। लगभग 4000 करोड़ रुपये के भारी-बजट से बनी और सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म को दुनिया भर के दर्शकों से काफी शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। हालांकि, फिल्म के तमाम पहलुओं पर चर्चा करते हुए सुनील लहरी ने इसकी जमकर तारीफ की है, लेकिन साथ ही इसके संगीत (म्यूजिक) को लेकर कुछ आलोचनात्मक विचार भी साझा किए हैं। उनके मुताबिक, फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी एक बेहतरीन फिल्ममेकर हैं, लेकिन उन्हें इस मेगा प्रोजेक्ट के कुछ गाने ज्यादा पसंद नहीं आए हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी तक यह पूरी फिल्म नहीं देखी है।
टीवी के ‘लक्ष्मण’ सुनील लहरी ने कहा— महाकाव्य सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता, संस्कृति और विश्वास का प्रतीक है
मीडिया और दर्शकों के सामने अपनी बात रखते हुए अभिनेता सुनील लहरी ने कहा कि निर्देशक नितेश तिवारी की ‘रामायण’ अब सिनेमाघरों में आ चुकी है और कई लोगों ने मुझसे इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि चूंकि वे खुद ऐतिहासिक ‘रामायण’ का एक अहम हिस्सा रह चुके हैं, इसलिए दौर और समय में बहुत अंतर आ चुका है। सुनील लहरी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी तक यह फिल्म नहीं देखी है और न ही वे इस महाकाव्य के कोई आधिकारिक रिसर्चर या अथॉरिटी हैं, इसलिए वे कोई पूर्ण समीक्षा नहीं कर सकते। फिर भी उन्होंने जोर देकर कहा कि यह महान ग्रंथ केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता, हमारी संस्कृति, संस्कारों और जन-जन के अटूट विश्वास का एक पवित्र प्रतीक है, जिसका सम्मान और ख्याल हम सभी को रखना चाहिए।
फिल्म के संगीत से थोड़े निराश नजर आए सुनील लहरी, कहा— अयोध्या का अपेक्षित लोकल फ्लेवर गानों में होना चाहिए था
फिल्म के गानों और संगीत पर बात करते हुए सुनील लहरी ने कहा कि नितेश तिवारी बेहद उम्दा निर्देशक हैं और उन्होंने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्में बनाई हैं। उन्होंने और पूरी स्टारकास्ट ने इस फिल्म को बनाने में बहुत मेहनत की होगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के पौराणिक महाकाव्यों में संगीत रीढ़ की हड्डी (बैकबोन) की तरह बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिल्म के जितने भी गाने उन्होंने सुने हैं, उनमें से कुछ के संगीत ने उन्हें थोड़ा निराश किया है। उनके अनुसार, इस तरह की भव्य गाथा में अयोध्या और उस कालखंड का जो ‘लोकल फ्लेवर’ या माटी की खुशबू होनी चाहिए थी, वह संगीत में पूरी तरह से महसूस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वे कोई विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन एक अच्छे श्रोता होने के नाते ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं।
मेकर्स और कलाकारों को दी शुभकामनाएं, कहा— फिल्म की सफलता इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे कई लोगों की आजीविका जुड़ी है
अपनी बात का समापन करते हुए सुनील लहरी ने फिल्म के निर्माता-निर्देशकों और तमाम कलाकारों को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हो। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि फिल्म की सफलता बेहद जरूरी है क्योंकि इसके साथ हजारों लोगों की रोजी-रोटी और आर्थिक भविष्य जुड़ा हुआ है।


