धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों के सुचारू संचालन और नियमों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शुक्रवार को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत जिला सलाहकार समिति की एक अहम बैठक बुलाई गई, जिसमें नए पंजीकरण और नवीनीकरण से जुड़े आवेदनों की गहराई से समीक्षा की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में तय मानकों को पूरा न करने वाले तीन नए पंजीकरण आवेदनों और एक नवीनीकरण आवेदन को सिरे से खारिज कर दिया गया।
समीक्षा बैठक में कुल आवेदनों पर हुआ विचार
समिति की इस बैठक के दौरान नए पंजीकरण के लिए प्राप्त कुल 18 और नवीनीकरण के लिए आए 17 आवेदनों पर सिलसिलेवार ढंग से विचार-विमर्श किया गया। बारीकी से जांच करने पर पाया गया कि कई आवेदन आवश्यक मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, जिसके चलते तीन नए आवेदनों को स्वीकृति नहीं दी गई। इसके अलावा, निर्धारित नियमों की अनदेखी का मामला सामने आने पर एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के नवीनीकरण के आवेदन को भी रद्द कर दिया गया।
20 नवंबर तक कमियां दूर करने का दिया गया अल्टीमेटम
नवीनीकरण के लंबित अन्य मामलों पर चर्चा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटरों को पहले नोटिस भेजने और उनकी कमियों को दूर करवाने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि सभी संबंधित सेंटरों को आगामी 20 नवंबर तक हर हाल में निर्धारित मानकों के अनुसार अपनी व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी। इसके बाद 20 नवंबर से 1 दिसंबर के बीच इन सेंटरों का सघन भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान कमियों के ठीक होने की पुष्टि होने के बाद ही आगामी बैठक में नवीनीकरण पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
औचक निरीक्षण और रेट चार्ट चस्पा करना हुआ अनिवार्य
जिला प्रशासन ने जिले के सभी अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ-साथ औचक निरीक्षण अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों और आम लोगों की सुविधा व पारदर्शिता के लिए प्रत्येक क्लीनिक के परिसर में विभिन्न चिकित्सीय जांचों की निर्धारित दरों का रेट चार्ट प्रमुख और दृश्य स्थान पर प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य है।
बैठक में मौजूद रहे तमाम प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. संजीव कुमार प्रसाद, कार्यपालक दंडाधिकारी नारायण राम, डॉ. विकास राणा, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. राकेश इंदर सिंह, सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) सत्येंद्र कुमार राय, नीता सिन्हा, पूजा रत्नाकर और सिविल सर्जन कार्यालय के आर.के. श्रीवास्तव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


