शारदीय नवरात्रि के पहले दिन बस्तर दशहरे की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन परंपरा के तहत जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में कलश स्थापना की रस्म पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई गई। इस अनुष्ठान में बस्तर राज परिवार के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। राज परिवार के कमलचंद भंजदेव ने मंदिर के भीतर पहुंचकर कलश स्थापित किए और मां दंतेश्वरी से बस्तर की सुख-शांति व समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा।
⚔️ रियासतकालीन हथियारों के साथ प्रज्वलित हुई अखंड ज्योति, अष्टमी के बाद इंद्रावती नदी में होगा प्रवाह
इस विशेष रस्म के दौरान रियासत काल के प्राचीन हथियारों को रखकर उनके सामने अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है। राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने बताया कि मंदिर के भीतर दो कलश—एक ज्योति कलश और दूसरा शक्ति कलश स्थापित किए जाते हैं। शक्ति कलश के पास शाही तलवारें रखकर अखंड ज्योत जलाई जाती है, जो लगातार आठ दिनों तक बिना बुझे प्रज्वलित रहती है। महाष्टमी के दिन हवन और विशेष पूजा-संपन्न होने के बाद इन कलशों व ज्योत को बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी में विसर्जित (प्रवाह) किया जाता है।
🌧️ बस्तर की खुशहाली और बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष मनोकामना, सदियों पुरानी है परंपरा
कलश स्थापना के दौरान राज परिवार और पुजारियों ने यह संकल्प लिया कि बस्तर दशहरे का यह महापर्व बिना किसी बाधा के संपन्न हो और क्षेत्र के सभी वर्गों के लोगों पर देवी की कृपा बनी रहे। इस वर्ष कलश स्थापना के दौरान बस्तर में हाल ही में आई विकराल बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों के लिए भी विशेष प्रार्थना की गई, ताकि पीड़ित परिवारों को इस कठिन समय से उबरने की शक्ति मिले। सदियों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन करते हुए बस्तर के निरंतर विकास की कामना की गई।

