बरेली : सुन्नी-बरेलवी मुसलमानों के विश्वविख्यात धार्मिक केंद्र ‘दरगाह आला हजरत’ से इस वर्ष सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक भाईचारे की एक अत्यंत प्रेरक मिसाल सामने आई है। 108वें उर्स-ए-रजवी के (non veg biryani will not be prepared) गरिमामयी आयोजन के दौरान लगने वाले विभिन्न लंगरों में इस बार मांसाहारी भोजन नहीं पकाया जाएगा।
non veg biryani will not be prepared – दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) ने समस्त लंगर आयोजकों एवं कमेटियों से पुरजोर अपील की है कि वे श्रद्धालुओं व जायरीनों को केवल सात्विक और पूर्णतः शाकाहारी भोजन ही परोसें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हिंदू समुदाय का अत्यंत पवित्र सावन मास चल रहा है और संपूर्ण बरेली शहर में शिवभक्ति का वातावरण है; अतः ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक की धार्मिक भावनाओं का आदर करना हमारा नैतिक दायित्व है।
बिरयानी के स्थान पर बनेगी पूरी-सब्जी
दरगाह प्रबंधन का स्पष्ट मानना है कि उर्स का मूल ध्येय प्रेम, इंसानियत और पारस्परिक सौहार्द का प्रसार करना है। अतः इस बार उर्स के लंगरों में पारंपरिक बिरयानी अथवा किसी भी प्रकार के मांसाहारी व्यंजनों के स्थान पर पूरी, सब्जी, दाल, चावल, खिचड़ी, हलवा और अन्य विशुद्ध शाकाहारी पकवान ही तैयार किए जाएंगे। धार्मिक एवं सामाजिक हल्कों में दरगाह प्रबंधन के इस ऐतिहासिक फैसले को बरेली की पौराणिक ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सराहा जा रहा है।


