गोहाना: हरियाणा के गोहाना उपमंडल अंतर्गत गांव बरोदा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 30 जून को सेवानिवृत्त हुए पूर्व प्रिंसिपल राजेंद्र सिंह के खिलाफ फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप में बरोदा थाना में धोखाधड़ी और जालसाजी का आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी एम.ए. (राजनीति विज्ञान) की डिग्री, अंकतालिका (मार्कशीट) और प्रोविजनल सर्टिफिकेट विभाग में जमा कराकर करीब 23 वर्ष स्थायी तथा लगभग 5 वर्ष अस्थायी सेवा की। विभागीय जांच में उनकी सभी शैक्षणिक डिग्रियां पूरी तरह फर्जी पाई गईं। इसके बाद डीसीपी (DCP) के आदेश पर यह केस दर्ज किया गया है।
📜 सीएम विंडो पर शिकायत से हुआ मामले का भंडाफोड़, मगध विश्वविद्यालय बोधगया से फर्जी निकली डिग्री
इस पूरे फर्जीवाड़े के खुलासे की शुरुआत अप्रैल 2026 में विद्यालय के ही एक शिक्षक द्वारा सी.एम. विंडो (CM Window) पर की गई शिकायत से हुई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद शिक्षा विभाग ने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की गहन जांच करवाई और एम.ए. डिग्री का सत्यापन बिहार में बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय (Magadh University, Bodh Gaya) से कराया।
विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट में पूर्व प्रिंसिपल की एम.ए. डिग्री, मार्कशीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट पूरी तरह जाली व फर्जी पाए गए। इसके तुरंत बाद जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग के मुख्यालय भेजी गई, जहां से दोषी पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के कड़े लिखित आदेश जारी किए गए।
⚖️ बीईओ राजकुमार पंघाल की शिकायत पर डीसीपी के निर्देश पर एफआईआर दर्ज, 2024 में बने थे प्रिंसिपल
मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) राजकुमार पंघाल ने पुलिस उपायुक्त (DCP) को लिखित शिकायत दी। डीसीपी के आदेश के बाद पुलिस ने बरोदा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया। पुलिस अब मामले की जांच कर यह भी पता लगाएगी कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया और इसके जरिए इतने सालों तक सरकारी सेवा कैसे प्राप्त की गई।
उल्लेखनीय है कि राजेंद्र सिंह की नियुक्ति करीब 28 वर्ष पहले पीजीटी (PGT) के पद पर हुई थी। शुरुआत में वे अस्थायी तौर पर भर्ती हुए थे और वर्ष 2003 में नियमित (स्थायी) हुए थे। इसके बाद नवंबर 2024 में उन्हें पदोन्नत कर प्रिंसिपल बनाया गया था और 30 जून 2026 को वे अपने पद से सेवानिवृत्त हुए थे।


