ग्वालियर: साइबर अपराध के नए और खतरनाक तरीके ‘डिजिटल अरेस्ट’ ने ग्वालियर में एक महिला अधिकारी को अपना शिकार बनाया है। स्वास्थ्य विभाग की सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन मीनाक्षी नाखरे को ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर 33 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और घर में कैद (डिजिटल अरेस्ट) जैसा महसूस कराया। इस दौरान महिला से करीब 1.57 करोड़ रुपये ऐंठ लिए गए।
☎️ क्या है डिजिटल अरेस्ट का जाल?
ठगों ने महिला को फोन कर खुद को दिल्ली का सीबीआई अधिकारी बताया। उन्होंने महिला के मोबाइल नंबर का उपयोग ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ केस में होने का डर दिखाया और गिरफ्तारी की धमकी दी। आरोपियों ने 10 मई से 13 जून तक महिला को डिजिटल अरेस्ट में रखा, जिसके कारण डर के मारे उन्होंने अपनी चारों फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वाकर ठगों के बताए अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों में आरटीजीएस (RTGS) के जरिए 1.57 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
🕵️ दिल्ली पहुंचने पर खुला सच
ठगों ने महिला को भरोसा दिलाया था कि 16 जून तक उन्हें एनओसी (NOC) मिल जाएगी, लेकिन जब कोई दस्तावेज नहीं आया, तो महिला ने 18 जून को खुद दिल्ली का रुख किया। वहां बारहखंभा पुलिस स्टेशन जाकर जब उन्होंने अपने केस के बारे में पूछा, तो उन्हें पता चला कि उनके साथ बड़ा फ्रॉड हुआ है। ठगों ने अपना मोबाइल नंबर भी बंद कर दिया था।
🛡️ पुलिस की अपील: कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट से?
साइबर सेल प्रभारी डीएसपी मनीष यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों को सतर्क किया है:
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संदेह रखें: कोई भी सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर कभी भी गिरफ्तारी या पैसों की मांग नहीं करती है।
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तत्काल रिपोर्ट करें: किसी भी संदिग्ध कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी या बैंक विवरण साझा न करें।
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पुलिस से संपर्क करें: ऐसे किसी भी दबाव वाले कॉल आने पर तुरंत नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या 1930 नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।


