बैतूल: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बैतूल में ब्रह्मकुमारी संस्था द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तीकरण महासम्मेलन’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आदिवासी संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय की प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण की सोच पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
🎓 शिक्षा और विकास पर जोर
राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि आदिवासी समाज को शिक्षा के क्षेत्र में अन्य वर्गों की बराबरी करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “वास्तविक सशक्तीकरण तब होता है, जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के बल पर अपने सामाजिक दायित्वों को समझे।” उन्होंने विकास और संस्कृति के बीच संतुलन को समृद्ध समाज का आधार बताया।
🇮🇳 2047 तक ‘विकसित भारत’ का संकल्प
राष्ट्रपति ने उपस्थित समुदाय को वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत ऐसा होना चाहिए जहाँ आध्यात्म, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण का समावेश हो। उन्होंने जनजातीय समाज के प्रेम, शांति और सह-अस्तित्व की भावना की सराहना की।
🚜 प्राकृतिक खेती का महत्व
पर्यावरण संरक्षण पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती की वकालत की। उन्होंने चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों और पेस्टीसाइड के बढ़ते उपयोग से भूमि की उपजाऊ शक्ति घट रही है और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने पर जोर दिया, जो आदिवासी समाज की जीवनशैली के करीब है।
🤝 गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल और ब्रह्मकुमारी संस्थान के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों को मजबूत रखते हुए आधुनिक शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।


