हरियाणा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और गायक रॉकी मित्तल से जुड़े चर्चित कसौली सामूहिक दुष्कर्म मामले ने एक बार फिर कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है। कसौली अदालत द्वारा केस को बंद करने के फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता ने अब हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया है। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
📂 हाई कोर्ट की सख्ती और रिकॉर्ड तलब
हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कसौली की निचली अदालत से इस केस से जुड़ी पूरी केस फाइल और तमाम दस्तावेज तत्काल प्रभाव से तलब कर लिए हैं। हाई कोर्ट के इस कदम को पीड़िता की न्याय की लड़ाई में एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि बंद हो चुका यह हाई-प्रोफाइल मामला फिर से जांच के दायरे में आएगा।
⚠️ क्या था पूरा मामला?
कसौली पुलिस ने 13 दिसंबर 2024 को पीड़िता की शिकायत पर गैंगरेप की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पीड़िता का आरोप है कि 23 जुलाई 2024 को कसौली के होटल ‘रॉस कॉमन’ में उसे जबरन शराब पिलाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, जिसे निचली अदालत ने स्वीकार कर केस बंद कर दिया था।
✊ न्याय के लिए संघर्ष जारी
निचली अदालत द्वारा केस को दोबारा खोलने की अर्जी खारिज होने के बाद पीड़िता ने हाई कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़िता के अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया था। अब सबकी निगाहें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस मामले की दिशा तय करेगी।
संपादकीय टिप्पणी: किसी भी संवेदनशील मामले में साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण होना न्याय के लिए अत्यंत आवश्यक है। क्या आपको लगता है कि इस तरह के चर्चित मामलों में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।


