मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शनिवार शाम करीब 4 बजे, एक युवती ने थाना परिसर के भीतर अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आत्मदाह करने की कोशिश की। वहां मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे बचा लिया और तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
👨👩👧 पिता की मौत और न्याय का लंबा संघर्ष
पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2025 में उसके पिता के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की थी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। युवती का दावा है कि वह लंबे समय से इस मामले में न्याय के लिए भटक रही है, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उसने स्थानीय पार्षद गोविंद तिवारी और अन्य लोगों पर अपने पिता की हत्या का सीधा आरोप लगाया है।
👮 पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
युवती ने अपने बयान में पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। उसका कहना है कि कई बार शिकायत करने और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उसे सिर्फ आश्वासन मिला। न्याय न मिलने से मानसिक रूप से परेशान होकर ही उसने यह कदम उठाया। युवती का आरोप है कि पुलिस आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है, जिसके चलते वह पूरी तरह से हताश हो चुकी थी।
🔎 प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच
इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है। फिलहाल पीड़िता का इलाज चल रहा है और पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि जांच के आधार पर ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय टिप्पणी: किसी भी पीड़ित का न्याय के लिए इस हद तक मजबूर हो जाना व्यवस्था के लिए एक बड़ा सबक है। क्या आपको लगता है कि इस तरह के मामलों में देरी के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए? अपने विचार नीचे कमेंट्स में साझा करें।


