पलामूः जिले के कई इलाकों में जर्जर बिजली के तार एवं पोल बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रहे हैं. पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर के अलावा कई इलाके हैं, जहां बिजली के तार एवं पोल झुके हुए हैं. पलामू के मेदिनीनगर में जर्जर बिजली के पोल एवं तार का मामला विधानसभा में भी उठ चुका है. पलामू में 3.2 लाख लोगों के पास विद्युत विभाग का कनेक्शन है. सबसे अधिक कनेक्शन मेदिनीनगर के इलाके में हैं. जबकि सबसे कम रामगढ़ के इलाके में हैं.
12 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं रहती
पलामू के कई इलाके जर्जर पोल एवं तार की समस्या से जूझ रहे हैं. हल्की बारिश या आंधी चलने के बाद कई इलाकों में ब्लैक आउट वाली स्थिति उत्पन्न हो जाती है और 8 से 9 घंटे तक बिजली गायब रहती है. ग्रामीण इलाकों की हालत सबसे अधिक खराब है. कई इलाकों में 12 घंटे से भी अधिक समय तक बिजली गायब रहती है.
रामनवमी के दौरान बिजली तार से 29 लोगों की हुई थी मौत
पलामू का रामनवमी हादसा पूरे देश भर में चर्चित रहा है. 12 अप्रैल 2000 को पलामू में रामनवमी के जुलूस के दौरान बिजली का तार गिर गया था. इस हादसे में 29 लोगों की मौत हुई थी. इस हादसे के बाद से देश भर में रामनवमी के दौरान बिजली काटने का परंपरा की शुरुआत हुई. घटना के 26 वर्ष हो जाने के बावजूद मेदिनीनगर के इलाके में बिजली के तार एवं पोल की स्थिति में अधिक बदलाव नहीं हुआ है.
ग्रामीण इलाकों का हाल और भी खराब है
बिजली के तार एवं पोल आज भी कई इलाकों में झूल रहे हैं. हालांकि कई इलाकों में बिजली विभाग के द्वारा कवर ओवर हेड तार लगाई गई है लेकिन इसकी गति काफी धीमी है. आज भी धार्मिक आयोजन के दौरान निकलने वाले जुलूस में बिजली काट दी जाती है. पलामू के मेदिनीनगर के सुदना के रहने वाले महेश कुमार बताते हैं कि पहले की तुलना में बिजली अधिक रहती है, लेकिन जर्जर पोल एवं तार दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रहे हैं. शहरी इलाके में यह हाल है तो ग्रामीण इलाकों का हाल क्या होगा.
विधानसभा में उठ चुका है मामला
पलामू में जर्जर बिजली तार एवं पोल का मामला विधानसभा में उठ चुका है. डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया ने विधानसभा में कहा था कि मेदिनीनगर में रामनवमी एवं मुहर्रम के दौरान हादसे हो चुके हैं. वह सरकार से मांग करते हैं कि बिजली की अंडरग्राउंड व्यवस्था की जाए. विधायक आलोक चौरसिया ने बिजली को लेकर कई स्तरों पर आवाज उठाई है और लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.


