ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. शनिवार सुबह वाराणसी के विद्या मठ से समर शंख फूंककर (Shankaracharya blew the conch) उन्होंने गऊ प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध का औपचारिक आगाज किया. ये यात्रा न केवल धार्मिक है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी गहरे हैं.
शंकराचार्य के अभियान की शुरुआत भक्ति और संकल्प के साथ हुई. सुबह 8:30 बजे उन्होंने विद्या मठ की गौशाला में गऊ पूजन किया. इसके बाद वे चिंतामणि गणेश के दरबार पहुंचे, जहां 15 मिनट की विशेष पूजा अर्चना कर यात्रा की अनुमति मांगी. संकट मोचन मंदिर में बजरंग बाण का पाठ करने के बाद, सुबह 9:30 बजे उनका काफिला लंका और बाबतपुर के रास्ते जौनपुर के लिए रवाना हो गया.
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इस यात्रा का रूट काफी दिलचस्प है. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी से शुरू हुई यह यात्रा अपने प्रथम रात्रि विश्राम के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंचेगी. शंकराचार्य के साथ उनके प्रमुख शिष्य मुकुंदानंद सहित 50 परिकरों का दल और 25 गाड़ियों का बड़ा काफिला चल रहा है.
Shankaracharya blew the conch – मीडिया से बात करते हुए शंकराचार्य भावुक और आक्रामक नजर आए. उन्होंने कहा, “ये देश का दुर्भाग्य है कि आज हमें गऊ रक्षा के लिए धर्मयुद्ध करना पड़ रहा है. अब चुप नहीं बैठेगा हिंदू. इस अभियान को ‘जिंदा हिंदू लखनऊ चलो’ का टैगलाइन दिया गया है, जो सीधे तौर पर सोई हुई जनता और सत्ता को जगाने का आह्वान है.


