पश्चिम बंगाल के चुनाव सामने है. बीजेपी ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है. बीजेपी की कोशिश है कि 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली बढत को बरकरार रखा जाए और इन चुनावों की गलतियों को इस बार ना दोहराया जाए. पार्टी राज्य में जारी SIR पर भी सतर्क और तैयार है. बीजेपी (BJP’s masterplan for Bengal elections) इस बार वैसे तो पश्चिम बंगाल की हर विधानसभा सीट पर आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ेगी. पर मुस्लिम बहुल सीटों पर बीजेपी टैक्टिकल रणनीति अपनाएगी.
पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य के अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच टीएमसी को बढ़त हासिल है. लिहाजा मुस्लिम बहुल सीटों पर बीजेपी अपना समय और रिसोर्स सोच समझकर इस्तेमाल करेगी. पश्चिम बंगाल विधानसभा की लगभग 70 से 85 सीटों पर जीत हार मुस्लिम मतदाता तय करते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इनमें से 75 सीटें जीती थी जो मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना में है.
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बीजेपी ने तय किया है कि इन 85 अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर सोच समझकर रणनीतिक तौर पर प्रचार और चुनाव प्रबंधन करेगी. इन 85 सीटों की तुलना में बीजेपी बाकी हिंदू मतदाता बहुल सीटों पर ज्यादा फोकस से साथ ही आक्रामक तरीके से प्रचार करेगी, जिसमें बांग्ला और बांग्ला भाषियों के लिए कल्याणकारी वादों -योजनाओं के साथ साथ बेहतर कानून-व्यवस्था का वादा किया जाएगा.
BJP’s masterplan for Bengal elections – बीजेपी इस बात पर भी जोर देगी कि जो बंगाल पहले दूसरे राज्यों के लोगों को रोजगार देता था, आज उसी बंगाल के लोग बेहतर रोजगार के अवसर के लिए दूसरे राज्य में जा रहे हैं. बीजेपी सरकार बनने पर रोजगार के अवसर के साथ साथ बंगाल की आर्थिक समृद्धि का वादा भी करेगी. बीजेपी घोषणापत्र में एक मजबूत कल्याणकारी सरकार और राज्य के विकास के पैकेज का वादा होगा ताकि टीएमसी सरकार द्वारा दी जा रही नकद सहायता योजनाओं का मुकाबला किया जा सके.


