बिहार का मुंगेर जिला लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है. हालांकि पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से लगातार चलाए जा रहे अभियानों से नक्सल नेटवर्क पर काफी हद तक अंकुश लगाया गया है. इसी क्रम में तीन लाख रुपये के इनामी और कुख्यात स्पेशल एरिया कमेटी कमांडर सुरेश कोड़ा ने गुरुवार को पुलिस के (Suresh Koda was another name of fear) सामने सरेंडर कर दिया. उसके सरेंडर के साथ ही जिला प्रशासन ने दावा किया है कि मुंगेर अब पूरी तरह नक्सल प्रभाव से मुक्त हो गया है.
पुलिस केंद्र मुंगेर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डीआईजी राकेश कुमार, एसटीएफ डीआईजी संजय कुमार सिंह और जिलाधिकारी निखिल धनराज सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सुरेश कोड़ा ने हथियार डाले. अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, लगातार चल रहे सघन अभियान और सुरक्षा बलों की दबिश के कारण वह मुख्यधारा में लौटने को तैयार हुआ.
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आत्मसमर्पण के समय सुरेश कोड़ा ने पुलिस को भारी मात्रा में हथियार भी सौंपे. इनमें एक AK-47, एक AK-56, दो इंसास राइफल और 505 कारतूस शामिल हैं. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह करीब 60 नक्सली और आपराधिक मामलों में वांछित था तथा पिछले लगभग 25 वर्षों से मुंगेर के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सक्रिय रहा था.
Suresh Koda was another name of fear – पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुंगेर में पिछले एक वर्ष से नक्सल विरोधी अभियान तेज किया गया था. 28 दिसंबर 2025 को भी तीन नक्सली कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि जुलाई 2025 में एक सक्रिय सदस्य ने संगठन छोड़ा था. राजासराय क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के बाद सुरेश कोड़ा के दस्ते को बड़ा नुकसान हुआ और उसके कई सहयोगी पहले ही सरेंडर कर चुके थे.


