मदर ऑफ डील से ज्यादा फादर ऑफ ऑल डील की चर्चा हो रही है. हो भी क्यों ना. ये डील दुनिया के सबसे बड़े मार्केट और दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी के बीच हो रही है. जिसका एक खाका तैयार कर लिया गया है. जिसपर दोनों देशों की आम सहमति भी बन चुकी है. इस खाके से जो बातें निकलकर सामने आई हैं. उन बातों पर (India-US Trade Deal) पूरी दुनिया की नजरें हैं. खासकर उन नंबर्स पर जो पूरी दुनिया को चौका सकते हैं. भारत और अमेरिका के बी हुई ट्रेड डील कोई आम ट्रेड नहीं है.
India-US Trade Deal – इसके लिए तैयार किए गए फ्रेमवर्क से दोनों देशों के बीच की मार्केट रीच में इजाफा होगा. टैरिफ कम होंगे. एक बड़े और व्यापक बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट की नींव रखी जाएगी. खास बात तो ये है कि दोनों देश पूरी दुनिया के सामने एक संतुलित ट्रेड का उदाहरण पेश करते हुए दिखाई देंगे. सप्लाई चेन में मजबूती मिलेगी. साथ ही तेजी के बदलते टेक माहौल में दोनों देश एक दूसरे का सहयोग करते हुए दिखाई देंगे. आइए कुछ नंबर्स के हिसाब से समझने की कोशिश करते हैं कि दुनिया की ‘महाशक्ति’ से महा-डील करने के क्या मायने हैं…
इस महा-डील से भारत को होने वाले फायदे
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- अमेरिका द्वारा निर्धारित 18 फीसदी टैरिफ, जो प्रमुख प्रतिस्पर्धियों से कम है
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- भारत के 44 अरब डॉलर के निर्यात को अमेरिका में टैरिफ फ्री एंट्री मिलेगी.
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- महत्वपूर्ण तकनीकी इनपुट, चिप्स, सेमीकंडक्टर, विमान और मशीनरी पर टैरिफ कम होगा.
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- मसालों, चाय, कॉफी, एवोकैडो, जौ, कैनरी सीड्स, बेकरी प्रोडक्ट्स, कोको और उसके उत्पाद, तिल, खसखस, फलों के जैम और पेस्ट पर जीरो टैरिफ.
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- धारा 232 के तहत आने वाली वस्तुओं, विमान और मशीनरी के पुर्जों, जेनेरिक दवाओं, फार्मा सामग्री और प्राथमिक ऑटो पुर्जों पर कोई एक्स्ट्रा टैरिफ नहीं.


