ब्रिक्स में शामिल होने की तुर्की की महत्वाकांक्षा एक बार फिर सुर्खियों में है. साल 2024 में औपचारिक आवेदन देने के बावजूद तुर्की को पूर्ण सदस्यता नहीं मिल पाई थी और उसका मामला ठंडे बस्ते में (Turkey BRICS Membership) चला गया था. अब चीन में नए राजदूत की नियुक्ति के साथ अंकारा ने दोबारा सक्रिय कूटनीतिक कोशिशें शुरू कर दी हैं.
तुर्की ने सेल्कुक उनाल को चीन में नया राजदूत नियुक्त कर साफ संकेत दिया है कि वह बीजिंग के साथ रिश्तों को और गहराई देना चाहता है. चीन पहुंचने के बाद उनाल ने व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग को प्राथमिकता बताया। दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास मजबूत करने और संवेदनशील मुद्दों पर संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
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ब्रिक्स को उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रभावशाली समूह माना जाता है, जिसमें फिलहाल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, ईरान, यूएई, इथियोपिया और इंडोनेशिया शामिल हैं. तुर्की का मानना है कि ब्रिक्स में शामिल होकर वह वैश्विक आर्थिक फैसलों में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है. साथ ही, पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम कर बहुपक्षीय विदेश नीति को आगे बढ़ा सकता है.
Turkey BRICS Membership – तुर्की की राह में सबसे बड़ी अड़चन उसकी नाटो सदस्यता मानी जा रही है. ब्रिक्स खुद को पश्चिम-प्रभावित वैश्विक व्यवस्था के विकल्प के तौर पर पेश करता है, ऐसे में नाटो के एक प्रमुख सदस्य का इसमें शामिल होना कई देशों को असहज करता है. इसी वजह से 2024 में तुर्की को केवल पार्टनर कंट्री का दर्जा दिया गया था. हालांकि अंकारा का तर्क है कि वह एक साथ पूर्व और पश्चिम दोनों के साथ संतुलित संबंध रख सकता है.


