राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों को बचाने की मांग को लेकर ‘पर्यावरण संघर्ष समिति’ के बैनर तले चल रहा महापड़ाव लगातार तीसरे दिन भी जारी है. आंदोलन अब और उग्र रूप लेने की ओर (Bikaner Khejri Movement) बढ़ रहा है. बिश्नोई समाज के संतों और पर्यावरण प्रेमियों में सरकार के प्रति रोष लगातार बढ़ता जा रहा है.
खेजड़ी बचाने के लिए सख्त कानून बनाने सहित दो सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन में अब तक 363 संत और पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे हैं. इस दौरान करीब 5 लोगों की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिसके चलते आंदोलन स्थल पर ही एक अस्थाई अस्पताल बनाया गया है, जहां डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की टीम तैनात है.
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संत सच्चिदानंद ने कहा कि पत्थर कठोर होता है, उसे तोड़ने के लिए कठोर बनना पड़ता है. सरकार नाजुक तरीकों से नहीं मान रही है, इसलिए साधु-संत और पर्यावरण प्रेमी अनशन पर बैठे हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि खेजड़ी सहित 50 वर्ष से अधिक पुराने किसी भी पेड़ को किसी भी परियोजना में काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए. यदि कहीं पेड़ काटे जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
Bikaner Khejri Movement – साधु-संतों ने दो टूक कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य सिर्फ पेड़ बचाना है. सनातन की सरकार है, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा, यह कहना है आंदोलनरत संतों का. वहीं भागीरथ तेतरवाल ने मांग की कि जब तक ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता, तब तक एक भी पेड़ नहीं काटा जाए.


