देश के बहुचर्चित पुणे पोर्श हिट एंड रन केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन आरोपियों को जमानत दिए जाने पर पीड़ित परिवार ने कड़ी नाराजगी जताई है. इस हादसे में जान गंवाने वाली जबलपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अश्विनी कोष्टा के पिता सुरेश कोष्टा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी और दुख व्यक्त किया है. सुरेश कोष्टा ने कहा कि (Pune Porsche Case) उन्हें उम्मीद थी कि जिस तरह निचली अदालतों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया था, उसी तरह शीर्ष अदालत भी जमानत याचिका खारिज करेगी, लेकिन जमानत मिलने से उन्हें यह आशंका है कि आरोपी अब सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को धमकाने की कोशिश भी कर सकते हैं.
पीड़ित परिवार ने मांग की है कि जमानत पर छूटे तीनों आरोपियों पर पुलिस-प्रशासन द्वारा सख्त निगरानी रखी जाए. उनके आने-जाने, संपर्कों और गतिविधियों पर कड़ी नजर हो, ताकि मामले की जांच प्रभावित न हो सके. सुरेश कोष्टा ने कहा कि आरोपियों पर पहले ही खून के सैंपल में छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप हैं. ऐसे में जमानत से न्याय प्रक्रिया कमजोर हो सकती है. उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि हादसे के वक्त पोर्श कार में पीछे बैठे दो आरोपियों पर अभी तक सख्त धाराओं में केस नहीं चलाया गया है. अश्विनी के पिता का कहना है कि दुर्घटना के समय कार में मौजूद हर व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी के खिलाफ समान रूप से कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.
Pune Porsche Case – गौरतलब है कि 19 मई 2024 को पुणे में यह हिट एंड रन केस हुआ था, जिसमें शराब के नशे में एक नाबालिग द्वारा चलाई जा रही लग्जरी पोर्श कार ने दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया गया था. इस दर्दनाक हादसे में जबलपुर की रहने वाली अश्विनी कोष्टा की भी मौके पर ही मौत हो गई थी.


