जम्मू कश्मीर के डोडा में 22 जनवरी को ऑपरेशन पर जाने के दौरान जवानों का सैन्य वाहन 200 फिट गहरी खाई में गिर गया. इस हादसे में 10 जवान शहीद हो गए. इन शहीद जवानों में एक झारखंड के रांची के वीर सपूत अजय लकड़ा भी शामिल थे. रांची के तिरिल बस्ती के लाबेद गांव रहने वाले शहीद जवान अजय लकड़ा का पार्थिव (entire village cried) शरीर शुक्रवार की देर रात रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पहुंचा. एयरपोर्ट पहुंचकर राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, के साथ-साथ सेना और राज्य के वरीय पदाधिकारी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी.
शनिवार को शहीद जवान अजय लकड़ा के पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान के साथ, उनके पैतृक गांव रांची के तिरिल बस्ती के लाबेद में अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान परिवार के साथ-साथ वहां मौजूद स्थानीय लोग और अन्य लोगों ने भारत माता की जय, शहीद अजय लकड़ा अमर रहे के नारे सम्मान में लगाए. शहीद जवान अजय लकड़ा की वृद्ध मां, बेटे के अंतिम विदाई के वक्त बार-बार बेहोश हो रही थीं और यह पूछ रही थीं कि अब उनका ख्याल कौन रखेगा, उनका नया पक्का मकान कैसे बनेगा?
entire village cried – शहीद बेटे अजय लकड़ा ने मां से फोन पर वादा किया था कि मार्च या अप्रैल के महीने में वह छुट्टी लेकर घर आएंगे और अपने पुराने मकान की जगह पर नया पक्का मकान बनाएंगे और फिर अपनी शादी करेंगे, लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि उनके साथ ऐसी अनहोनी हो जाएगी. मां ने बताया कि 2003 में ही शहीद अजय के पिता का निधन हो गया था. छोटे-छोटे बच्चों को किसी तरह सड़क किनारे हड़िया बेच कर पाला पोसा, और आज आंखों के सामने ही अपने बेटे को इस तरह कफन में लिपटा हुआ देखना पड़ रहा है.


