देश के बैंकिंग सेक्टर में बीते कुछ सालों में काफी बदलाव देखने को मिला है. जहां कई बैंकों का मर्जर हो गया. वहीं कुछ बैंक इतने बड़े हो हैं कि देश के कई कॉरपोरेट ग्रुप्स को टक्कर दे रहे हैं. वहीं स्मॉल (HDFC-ICICI also left behind) फाइनेंस बैंकों की एंट्री ने देश के दिग्गज बैंकों को कड़ी टक्कर दी है. हाल ही में आरबीआई का जो आंकड़ा सामने आया है, उससे ये बात समझ में आई है कि छोटे बैंक बड़े धमाके से कम नहीं है. जॉब देने के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने बड़े बैंकों को पीछे छोड़ दिया है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फ्रेश आंकड़ों के अनुसार, स्मॉल फाइनेंस बैंक वित्त वर्ष 2025 में 26,736 रिक्रूटमेंट के साथ भारतीय बैंकिंग सेक्टर में बड़े जॉब क्रिएटर के रूप में उभरे हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है. प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने अपनी रिक्रूटमेंट प्रोसेस को थोड़ा कम किया है. जिसकी वजह से वित्त वर्ष 2024 तक के तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष 75,000 से 1,00,000 कर्मचारियों को रिक्रूट करने के बाद वित्त वर्ष 2025 में कर्मचारियों की संख्या में 7,257 की कमी आई. यही वजह है कि स्मॉल फाइनेंस बैंक वित्त वर्ष 2025 में सबसे बड़े बैंकिंग रिक्रूटर बन गए हैं.
HDFC-ICICI also left behind – वहीं दूसरी ओर लोन और डिपॉजिट में 1 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी को देखते हुए उनके ऑपरेशन का साइज ना के बराबर देखने को मिला है; फिर फिर भी सार्वभौमिक बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करने के प्रयासों के चलते छोटे बैंकों ने पिछले पांच वर्षों में काफी ग्रोथ दर्ज की है; वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2025 के बीच उनके लोन और डिपॉजिट में क्रमशः लगभग 25 फीसदी और 34 फीसदी का ग्रोथ देखने को मिला है.


